- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
13 जून 2025 को मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया, जब इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए। इन हमलों का केंद्र तेहरान और ताब्रीज़ के पास था, जिसके बाद ईरान ने देशव्यापी आपातकाल की घोषणा की और जवाबी मिसाइल हमले शुरू किए। इस सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी, स्टॉक और कमोडिटी बाजार शामिल हैं। यह हमला मध्य पूर्व में पहले से चल रहे इज़राइल-गाजा संघर्ष के बाद हुआ, जिसने क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
गाजा में इज़राइल का सैन्य अभियान मार्च 2025 से और तीव्र हो गया है। इज़राइल ने गाजा में सभी मानवीय सहायता पर रोक लगा दी, जिसके कारण वहां भुखमरी और चिकित्सा आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई है। संयुक्त राष्ट्र और यूनिसेफ ने इसे “बच्चों के खिलाफ युद्ध” करार दिया है। 11 जून 2025 को यूनिसेफ ने बताया कि गाजा में बच्चों की स्थिति भयावह है, जहां कुपोषण और बीमारियों ने हजारों लोगों की जान ले ली है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, 7 जून को इज़राइली बमबारी में गाजा सिटी के सब्रा इलाके में 16 लोग मारे गए, जबकि 50 से अधिक घायल हुए।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप है कि वह अपनी राजनीतिक स्थिति को बचाने के लिए युद्ध को लंबा खींच रहे हैं। यूरोप और इज़राइल में कई लोग मानते हैं कि नेतन्याहू युद्ध को इसलिए बढ़ावा दे रहे हैं ताकि उनकी सरकार पर 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले की विफलता की जांच न हो और उनके भ्रष्टाचार के मुकदमे में देरी हो। इज़राइल में शांति कार्यकर्ता और युद्ध-विरोधी समूहों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं, जिसमें तेल अवीव में हजारों लोग सड़कों पर उतरे।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्ध को लेकर चिंतित है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने इसे “नरसंहार” करार दिया, जबकि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से तेल और सोने की कीमतों में उछाल आया है, जबकि वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।

