लखनऊ: राजधानी लखनऊ में 6 जुलाई 2025 को इस्लामिक कैलेंडर की 10वीं तारीख (आशूरा) के अवसर पर परंपरागत मोहर्रम जुलूस निकाला गया। यह जुलूस सुबह 10 बजे नक्खास इलाके के नाजिम साहब इमामबाड़ा, थाना चौक से शुरू हुआ और पुराने लखनऊ के विभिन्न मार्गों से गुजरा। लाखों अकीदतमंदों ने मातमी जुलूस में हिस्सा लिया, जिसमें शिया समुदाय के लोग शामिल थे। जुलूस की सुरक्षा और सुचारू संचालन के लिए पुलिस, पीएसी, आरएएफ और एटीएस कमांडो तैनात रहे। शहर में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।
इस दौरान स्वामी सारंग जैसे गैर-मुस्लिम व्यक्तित्वों ने भी जुलूस में हिस्सा लिया, जो सामाजिक एकता का प्रतीक बना। पुलिस ने ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए निगरानी की, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। जुलूस में शामिल लोग ताजियों और अलम के साथ मातम मनाते दिखे, जो हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में आयोजित किया जाता है।
इस आयोजन ने लखनऊ की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता को दर्शाया, लेकिन ट्रैफिक व्यवधान के कारण शहरवासियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने जुलूस के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए थे। यह घटना लखनऊ की सबसे बड़ी खबर रही, क्योंकि इसने सामुदायिक एकता और परंपराओं को उजागर किया।

