इलाहाबाद | इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित हिमांशु हत्या कांड में एक अभियुक्त को जमानत प्रदान की है। यह वही मामला है जिसकी सुनवाई के दौरान निचली अदालत ने पहले जमानत आवेदन ख़ारिज कर दिया था।
यह मामला भारतीय दंड संहिता (नवीन) 2023 की धाराओं 103(1), 238 व 3(5) के अंतर्गत दर्ज हुआ था और देश के कई प्रमुख समाचार चैनलों, जिनमें NDTV भी शामिल है, पर इस घटना की लगातार चर्चा होती रही। घटना दिसंबर 2024 में ज़िला बागपत में हुई थी और इससे जुड़े हालात ने पूरे प्रदेश में व्यापक चर्चा पैदा कर दी थी।
इस प्रकरण में उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली ही तारीख़ पर सुनवाई के दौरान जमानत मंज़ूर की। यह आवेदन और बहस अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव द्वारा तैयार व प्रस्तुत की गई थी।
सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया गया कि अभियुक्त का नाम प्राथमिकी (एफ.आई.आर.) में शामिल नहीं था, अभियोजन का पूरा आधार केवल सीसीटीवी फुटेज पर है जिसमें कोई हिंसक गतिविधि दिखाई नहीं देती, और न ही कोई हथियार, गोली या अन्य आपराधिक साक्ष्य घटना स्थल से बरामद हुआ।
जमानत आदेश प्राप्त होने के बाद अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा –
“ईश्वर की कृपा से माननीय न्यायालय ने पहली ही तारीख़ पर जमानत प्रदान की। हर मुक़दमा अधिवक्ताओं के लिए एक ज़िम्मेदारी की याद दिलाता है और हमें अपनी तैयारी, निष्ठा व ईमानदारी पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देता है।”
क़ानूनी जगत में इस आदेश को इस दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य के बिना उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह आदेश इस बात की मिसाल है कि उच्च न्यायालय गंभीर मामलों में भी, यदि अभियोजन का पक्ष दुर्बल हो, तो विधि के अनुसार अभियुक्त को राहत देने से नहीं हिचकिचाता।

