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Akhand Rashtra News > उत्तर प्रदेश > सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल डी. प्रकाश राव को विकलांगता पेंशन – सशस्त्र बल अधिकरण लखनऊ ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
उत्तर प्रदेशदेश

सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल डी. प्रकाश राव को विकलांगता पेंशन – सशस्त्र बल अधिकरण लखनऊ ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

Prashant Tripathi - Lucknow
Last updated: August 21, 2025 9:56 am
Prashant Tripathi - Lucknow
6 months ago
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लखनऊ। सशस्त्र बल अधिकरण (Armed Forces Tribunal), क्षेत्रीय पीठ लखनऊ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल डी. प्रकाश राव (सेवानिवृत्त) को विकलांगता पेंशन (Disability Pension) का लाभ देने का आदेश जारी किया है। यह फैसला न केवल राव के लिए बड़ी राहत है बल्कि उन सभी पूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) के लिए मिसाल है जो वर्षों से पेंशन और विकलांगता लाभ के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह मामला लखनऊ की प्रतिष्ठित विधिक संस्था प्रोएक्टिव लीगल (Proactive Legal) की ओर से लड़ा गया।

Contents
  • बीमारी को सेवा से जुड़ा मानने के बावजूद पेंशन रोकी गई
    • अधिकरण का निर्णय
  • सैनिकों के लिए बड़ी मिसाल

बीमारी को सेवा से जुड़ा मानने के बावजूद पेंशन रोकी गई

लेफ्टिनेंट कर्नल डी. प्रकाश राव ने वर्ष 2005 में सेना की मेडिकल कोर (Army Medical Corps) में सेवा ज्वाइन की थी। दिसंबर 2022 में उन्होंने निम्न चिकित्सकीय श्रेणी (Low Medical Category) में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Retirement) ली। इस दौरान उन्हें प्राइमरी हाइपरटेंशन (Primary Hypertension) की समस्या हुई।

रिलीज मेडिकल बोर्ड (Release Medical Board) ने बीमारी को सैन्य सेवा से उत्पन्न एवं उससे बढ़ी हुई (Attributed and Aggravated by Military Service) मानते हुए उनकी विकलांगता 30 प्रतिशत जीवनभर के लिए आंकी। इसके बावजूद संबंधित सक्षम प्राधिकारी ने मेडिकल बोर्ड की राय को नज़रअंदाज़ करते हुए दावा खारिज कर दिया और कहा कि बीमारी “न तो सैन्य सेवा से जुड़ी है और न ही उससे बढ़ी है।”

मामले की पैरवी प्रोएक्टिव लीगल की टीम ने वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार मिश्रा के नेतृत्व में की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सैपर मोहिन्दर सिंह बनाम भारत संघ और राम अवतार केस जैसे ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला दिया।

दलील दी गई कि मेडिकल बोर्ड की राय को बिना किसी उच्चतर मेडिकल बोर्ड (Higher Medical Board) द्वारा पुनः परीक्षण कराए कोई भी प्रशासनिक प्राधिकारी खारिज नहीं कर सकता। इस आधार पर दावा किया गया कि लेफ्टिनेंट कर्नल राव का विकलांगता पेंशन लाभ रोका जाना गैरकानूनी था।

अधिकरण का निर्णय

माननीय सशस्त्र बल अधिकरण (AFT Lucknow Bench) ने प्रोएक्टिव लीगल की दलीलों को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि:

  • लेफ्टिनेंट कर्नल डी. प्रकाश राव की बीमारी सैन्य सेवा से उत्पन्न और उससे बढ़ी हुई मानी जाए।
  • उन्हें 30 प्रतिशत विकलांगता पेंशन दी जाए, जिसे नियम अनुसार 50 प्रतिशत तक राउंड ऑफ किया जाए।
  • यह लाभ सेवानिवृत्ति की अगली तिथि से लागू होगा।
  • आदेश का पालन चार माह के भीतर करना होगा, अन्यथा सरकार को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (Interest) देना होगा।

सैनिकों के लिए बड़ी मिसाल

यह निर्णय केवल एक अधिकारी के लिए राहत नहीं है, बल्कि हजारों पूर्व सैनिकों के लिए प्रेरणा है। अक्सर प्रशासनिक आदेशों से मेडिकल बोर्ड की राय को दरकिनार कर दिया जाता है। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि सैनिकों के अधिकार (Rights of Soldiers) और पेंशन लाभों से समझौता नहीं किया जा सकता।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश भविष्य में अन्य मामलों में भी आधार बनेगा और पूर्व सैनिकों को न्याय पाने की राह आसान करेगा।

लखनऊ पीठ का यह फैसला भारतीय सेना (Indian Army) के पूर्व सैनिकों के लिए एक ऐतिहासिक राहत है। यह न केवल लेफ्टिनेंट कर्नल डी. प्रकाश राव को न्याय दिलाता है, बल्कि उन सभी सैन्यकर्मियों को आशा देता है जो लंबे समय से विकलांगता पेंशन और अन्य अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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ByPrashant Tripathi - Lucknow
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Prashant Tiwari is a journalist and digital media expert from Unnao, based in Lucknow. while Experience services in digital marketing, website design, promotions, and political campaign management.
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