पटना/नई दिल्ली (अखंड राष्ट्र न्यूज़): बिहार की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी ने बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही वह बिहार के इतिहास में मुख्यमंत्री पद संभालने वाले बीजेपी के पहले नेता बन गए हैं। यह बड़ा बदलाव नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद हुआ है, जिन्हें अब राज्यसभा के लिए नामित किया गया है।
20 साल के नीतीश राज का अंत
पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार का युग अब एक नए मोड़ पर आ गया है। उनके पद से हटने के बाद सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना गया। बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि सम्राट चौधरी अब मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालेंगे।
कौन हैं सम्राट चौधरी?
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राजनीतिक विरासत: 57 वर्षीय सम्राट चौधरी दिग्गज नेता शकुनी चौधरी के बेटे हैं।
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सफर: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आरजेडी (RJD) और जेडीयू (JDU) से की थी, लेकिन 2017 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी किस्मत चमक गई।
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तेज तर्रार छवि: 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया और 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद वह तारापुर सीट से जीतकर डिप्टी सीएम बने थे।
बीजेपी के लिए क्यों हैं अहम?
सम्राट चौधरी को संगठन का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। उन्होंने एनडीए सरकार में गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो संभाले हैं। नीतीश कुमार के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलने वाले सम्राट अब खुद बिहार के ‘कैप्टन’ बन चुके हैं।
बिहार में अब क्या बदलेगा?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और सम्राट चौधरी के हाथ में कमान आने से बिहार बीजेपी अब पूरी तरह से स्वतंत्र होकर अपनी रणनीति बना सकेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है।
जल्द ही एनडीए विधायक दल की बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति और कैबिनेट विस्तार पर चर्चा की जाएगी। बिहार की इस बड़ी हलचल पर ‘अखंड राष्ट्र न्यूज़’ की नजर बनी हुई है।
