मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की जीरो टॉलरेंस नीति को खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए जनपद उन्नाव के दही थाना अंतर्गत तैनात सिपाही नरेंद्र और मालखाना प्रभारी सिपाही आशीष ने भ्रष्टाचार का ऐसा खौफनाक ‘कुबेर लोक’ खड़ा किया है, जिसे सुनकर जिले के कप्तान साहब के भी होश उड़ जाएंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के आला अधिकारियों को कानों-कान खबर तक नहीं हुई और इन दोनों सिपाहियों ने मात्र 4 साल के कार्यकाल में 8 से 10 करोड़ रुपये की अवैध काली संपत्ति बटोर कर खुद को इलाके का ‘सिंडिकेट बादशाह’ घोषित कर दिया है।
हमारे विशेष संवाददाता के हाथ लगे पुख्ता सबूतों ने पूरी खाकी को शर्मसार कर दिया है। यह सिपाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के वो ‘मैनेजर’ हैं जो थाना प्रभारी से लेकर हर बड़ी ‘डील’ को खुद तय करते हैं। एक विशेष ऑडियो रिकॉर्डिंग में सिपाही नरेंद्र बिना किसी डर के ‘मैनेजमेंट’ की डील करता सुनाई दे रहा है, जिसमें इलाके की दो नामी कंपनियों के मैनेजरों के साथ पुलिस की सांठ-गांठ का पूरा काला खेल उजागर हो गया है।
ये दोनों सिपाही सिर्फ काली कमाई ही नहीं कर रहे थे, बल्कि सिपाही आशीष मालखाने की आड़ में और नरेंद्र अपनी सेटिंग के दम पर कुछ ‘बड़े रसूखदारों’ के साथ मिलकर स्लॉटर हाउस और गौवंश तस्करी के धंधे को सीधा संरक्षण दे रहे थे। हाल ही में एक जांबाज पत्रकार द्वारा उजागर की गई गौवंश तस्करी की घटना भी इन्हीं के ‘मैनेजमेंट’ का हिस्सा थी।
गुप्त सूत्रों से प्राप्त वीडियो और रिकॉर्डिंग ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि दही थाना की गद्दी पर जो भी बैठता है, उस तक ‘मोटा चढ़ावा’ पहुँचाने और थाने की हर अवैध कमाई को मैनेज करने की जिम्मेदारी इन्हीं ‘सिंडिकेट के बादशाहों’ के कंधों पर रहती है। शर्म की बात तो ये है कि वीडियो में ये सिपाही वर्दी की मर्यादा को तार-तार करते हुए कह रहे हैं कि “देशभक्ति में कुछ नहीं रखा, बस मजे करो और पैसा कमाओ।”
कल सुबह इन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों— नरेंद्र और आशीष —के नाम, चेहरे और इनकी बेनामी संपत्ति की पूरी कुंडली सार्वजनिक की जाएगी। गौवंश की तस्करी से लेकर स्लॉटर हाउस तक के सिंडिकेट में इनका नाम अब साक्ष्यों के साथ सामने आ चुका है। देखना ये है कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्या जिला प्रशासन अब भी सोया रहेगा या फिर इन वर्दीधारी लुटेरों पर योगी जी का हंटर चलेगा?
