आज दिल्ली की राजनीति में एक तीखा सवाल गूंज रहा है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया है – “मोदी जी क्या आप अंग्रेज़ हैं? क्या भारत में ब्रिटिश राज है?”
संजय सिंह ने साफ कहा कि उन्हें पता है “आप लोग तिरंगे से नफरत करते हैं। आप लोगों ने 52 साल तक RSS के मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया।” और फिर उन्होंने वर्तमान घटना को जोड़ते हुए कहा कि CJP के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को तिरंगा फहराने और भारत माता की जय लगाने के कारण जेल भेज दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी – “युवाओं से पंगा मत लो मोदी जी, ये आपकी तानाशाही का अंत जल्द करेंगे।”
क्या हुआ था जंतर मंतर पर?
13 अक्टूबर को CJP के कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचे। जगह को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया था। वे तिरंगा लेकर अंदर गए, नारे लगाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने उन्हें ट्रेस्पासिंग और बॉन्ड तोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया। अगले दिन सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजकर तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि जगह डिनोटिफाइड है और उन्होंने कानून तोड़ा। लेकिन संजय सिंह और कई अन्य नेताओं का तर्क है कि तिरंगा लहराना और भारत माता की जय कहना अपराध कैसे हो सकता है?
52 साल का पुराना सवाल
संजय सिंह ने जो 52 साल का जिक्र किया, वो नया नहीं है। इतिहास में दर्ज है कि RSS ने 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 को अपने नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा फहराया था। उसके बाद लंबे समय तक नहीं फहराया। 26 जनवरी 2002 से नियमित रूप से फहराना शुरू हुआ। इस अंतराल को कई नेता बार-बार उठाते रहे हैं। RSS का जवाब रहा है कि पुराने Flag Code के तहत निजी संगठनों पर पाबंदी थी। लेकिन सवाल उठता रहता है कि राष्ट्रीय ध्वज को लेकर इतने सालों तक क्यों संकोच रहा।
आज जब युवा तिरंगा लेकर विरोध कर रहे हैं और उन्हें जेल भेजा जा रहा है, तो यही पुराना सवाल फिर से जीवंत हो गया है।
तिरंगा किसका है?
जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने वाले युवा कहते हैं कि वे देश की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का विरोध कर रहे हैं। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर सवाल उनके आंदोलन का मूल है। संजय सिंह के वीडियो ने इस आवाज को और तेज कर दिया है। उन्होंने सीधे मोदी से पूछा कि क्या तिरंगा सिर्फ सत्ता के अनुकूल होने पर ही सम्मान का हकदार है।
जब कोई तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण विरोध करता है और उसे जेल भेज दिया जाता है, तो लोकतंत्र के लिए ये खतरे की घंटी है। युवा पूछ रहे हैं – क्या तिरंगा फहराना अब अपराध है? क्या भारत माता की जय कहना अब खतरा बन गया है?
संजय सिंह का वीडियो सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है। ये उस असंतोष को आवाज दे रहा है जो दिल्ली की सड़कों पर पिछले कई दिनों से उमड़ रहा है। CJP के नेता जेल में हैं, लेकिन उनके साथ जो सवाल उठे हैं, वो जेल की दीवारों से बाहर निकलकर पूरे देश में गूंज रहे हैं।
तिरंगा सबका है। और जब कोई इस बात को याद दिलाता है कि 52 साल तक एक संगठन के मुख्यालय पर ये ध्वज नहीं फहरा, तो सवाल और गहरा हो जाता है। युवाओं से पंगा लेने का नतीजा क्या होगा – ये आने वाले दिन बताएंगे। लेकिन एक बात साफ है – तिरंगा लहराने वाले आज जेल में हैं, और सवाल सड़कों पर।


