तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आज एक बड़ा प्रदर्शन हुआ। सत्तारूढ़ TVK, कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के अन्य दलों ने सड़कों पर उतरकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए – “डेमोक्रेसी की हत्या”। उन्होंने Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और कहा कि मतदाता सूची में हो रहे बड़े पैमाने पर बदलाव लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। मांग साफ थी – ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें।
प्रदर्शन का प्रमुख नारा
“डेमोक्रेसी की हत्या”
यह प्रदर्शन चेन्नई के एगमोर इलाके में रामाडा सर्कल पर हुआ। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी. मणिकम टैगोर ने नेतृत्व किया। TVK की तरफ से स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन मौजूद रहे। विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन, एमडीएमके के महासचिव वैको और अन्य घटक दलों के नेता भी शामिल हुए। पार्टियों के झंडे लहराए गए और नारे गूंजे।
ये TVK के लिए खास महत्व रखता है। पार्टी 3 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक में शामिल हुई थी। उसके बाद CEC के इस्तीफे की मांग वाले किसी बड़े प्रदर्शन में यह उसकी पहली भागीदारी है। अब तक TVK इस मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाए हुए थी, लेकिन आज उसने खुलेआम सड़क पर आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
दिल्ली में पिछले कई दिनों से जो कुछ हो रहा है, उसका असर अब दक्षिण भारत तक पहुंच गया है। जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने वाले नेताओं को हिरासत में लिया गया। हजारों युवाओं को रोका गया। फिर भी मांग एक ही है – चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता। चेन्नई का यह प्रदर्शन उसी मांग को दक्षिण तक ले गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। बिना उचित नोटिस और सुनवाई के मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा रहा है। विपक्ष इसे “वोट चोरी” बता रहा है। चेन्नई में भी यही आवाज उठी कि चुनाव आयोग किसी एक पार्टी के हित में काम नहीं कर सकता। लोकतंत्र की नींव मतदाता सूची की निष्पक्षता पर टिकी होती है। अगर उसमें संदेह पैदा हो जाए तो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
कांग्रेस सांसद विजय वसंत ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि लोगों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। TVK के शामिल होने से प्रदर्शन को और मजबूती मिली है।
यह प्रदर्शन सिर्फ राजनीतिक पार्टियों का नहीं है। ये उस बड़े असंतोष का हिस्सा है जो युवाओं और आम लोगों में फैल रहा है। दिल्ली में CJP के कार्यकर्ता तिरंगा लेकर सड़कों पर हैं। सुप्रीम कोर्ट में SIR को लेकर याचिका चल रही है। और अब चेन्नई में भी वही नारा गूंज रहा है – डेमोक्रेसी की हत्या बंद हो।
दक्षिण भारत में यह पहली बार नहीं है जब चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठे हों। लेकिन आज का प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी खुद मैदान में उतर आई है। TVK का शामिल होना INDIA ब्लॉक के लिए नया संदेश है। अब विरोध सिर्फ विपक्षी दलों तक सीमित नहीं रह गया है।
लोकतंत्र बचाने की ये मांग अब उत्तर से दक्षिण तक फैल चुकी है। चेन्नई की सड़कों पर आज जो आवाज उठी, वो साफ कहती है कि मतदाता अधिकारों की रक्षा कोई समझौता नहीं हो सकती। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग अब सिर्फ दिल्ली की सड़कों तक नहीं, पूरे देश की सड़कों तक पहुंच चुकी है।


