BJP vs Congress की जुबानी जंग अब केरल में राज्यपाल के खान-पान और आतिथ्य सत्कार के खर्चों को लेकर काफी तेज हो गई है। केरल के राज्यपाल के आधिकारिक कार्यक्रमों और भोजन खर्च को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के इन आरोपों को पूरी तरह आधारहीन, हास्यास्पद और ओछी राजनीति करार दिया है।
भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के भोजन और सामान्य प्रोटोकॉल को लेकर विवाद खड़ा करना कांग्रेस की घटिया मानसिकता को दर्शाता है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि राजभवन का एक तय प्रशासनिक ढांचा और प्रोटोकॉल होता है, जिसे अनावश्यक राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजभवन के खर्च पर क्यों मचा सियासी घमासान?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेताओं ने राजभवन में होने वाले मासिक खर्चों और विशेष रूप से खान-पान के बिलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि राज्य जब वित्तीय संकट से जूझ रहा है, ऐसे समय में राजभवन के भव्य आयोजनों और भोजन पर भारी धनराशि खर्च की जा रही है।
इस मुद्दे को तूल पकड़ते देख भाजपा ने मोर्चा संभाला और विपक्षी नेताओं को आड़े हाथों लिया। इस पूरे मामले में BJP vs Congress का रुख साफ तौर पर दिखाता है कि राज्य की राजनीति अब वास्तविक जनसमस्याओं से भटक कर व्यक्तिगत और सतही आरोपों की ओर मुड़ गई है। भाजपा ने कहा कि राजभवन में आने वाले गणमान्य अतिथियों और बैठकों का एक तय नियम होता है, जिसे व्यक्तिगत खर्च से जोड़ना अनुचित है।
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का तीखा पलटवार
भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने कांग्रेस के बयानों को ‘मूर्खतापूर्ण’ करार देते हुए कई अहम बिंदु सामने रखे हैं:
- राजभवन किसी एक दल का कार्यालय नहीं बल्कि राज्य का सर्वोच्च संवैधानिक केंद्र है।
- वहां आयोजित होने वाले रात्रिभोज और आधिकारिक बैठकें राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत होती हैं।
- कांग्रेस पार्टी अपने अस्तित्व के संकट से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बेतुके मुद्दे उठा रही है।
- जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर बात करने के बजाय खाने के बिलों पर बहस करना विपक्ष के दिवालियापन का सबूत है।
यह भी पढ़ें: सीतापुर रेलवे क्रॉसिंग हादसे के बाद भी प्रशासन बेपरवाह
राज्यपाल की गरिमा और संवैधानिक मर्यादा का सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में राजभवन और राजनीतिक दलों के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। हालांकि, राज्यपाल के भोजन और व्यक्तिगत आचरण को लेकर इस तरह के विवाद पहले कम ही देखने को मिले हैं। संवैधानिक जानकारों के अनुसार, इस तरह की बहस से पद की गरिमा धूमिल होती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह BJP vs Congress के बीच चल रहा यह विवाद अब दोनों राष्ट्रीय दलों की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। राज्य के सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों की खींचतान में राजभवन लगातार केंद्र बिंदु बना हुआ है, जिससे शासन-प्रशासन के स्तर पर भी असहजता की स्थिति बन रही है।
भाजपा ने अंत में कहा कि कांग्रेस को नकारात्मक राजनीति छोड़कर राज्य के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आने वाले स्थानीय और आम चुनावों को देखते हुए BJP vs Congress के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और अधिक उग्र होने की संभावना है, क्योंकि कोई भी दल पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है।


