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‘रामहित’ बने ‘Ram Hit’ और अनुवाद हुआ—’राम ने यादव को मारा’: चुनाव आयोग के AI सॉफ्टवेयर का अनोखा ‘लीला’

Digital Desk - Lucknow
Last updated: October 24, 2026 5:28 pm
Digital Desk - Lucknow
27 minutes ago
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राम ने यादव को मारा
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नई दिल्ली: एक तरफ जहाँ देश भर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), वोटर लिस्ट से कटते नामों और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर ज़बरदस्त राजनीतिक घमासान मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जिस हाइटेक और ‘फुल-प्रूफ’ डिजिटल सिस्टम का बखान करते नहीं थक रहे थे, उसी के एक कारनामे ने पूरे आयोग को बगले झाँकने पर मजबूर कर दिया है।

Contents
बखान हाइटेक सिस्टम का, काम ‘अनाड़ियों’ जैसा!विपक्ष का हमला, वीडियो वायरल होने के बाद जागा आयोग

आयोग का यह तथाकथित अति-आधुनिक सॉफ्टवेयर एक नाम का बेसिक सा अनुवाद (Translation) तक ठीक से नहीं कर पाया। मामला ‘रामहित यादव’ नाम के एक मतदाता से जुड़ा है। सॉफ्टवेयर ने पहले तो उनके नाम का अंग्रेजी में अनुवाद किया— ‘Ram Hit Yadav’। यहाँ तक भी गनीमत थी, लेकिन जब उसी अंग्रेजी नाम का वापस हिंदी अनुवाद किया गया, तो सॉफ्टवेयर ने ऐसा गजब ढाया कि अर्थ का अनर्थ करते हुए छाप दिया— “राम ने यादव को मारा!”

बखान हाइटेक सिस्टम का, काम ‘अनाड़ियों’ जैसा!

जिस वक्त विपक्षी दल और छात्र संगठन सड़कों पर उतरकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और आयोग बार-बार अपने हाई-टेक डेटाबेस व सॉफ्टवेयर का हवाला देकर सब कुछ दुरुस्त होने का दावा कर रहा है, ऐसे में इस ‘भाषाई बाहुबली’ कारनामे ने टेक्नोलॉजी के दावों की हवा निकाल दी है। जिस शख्स का नाम उनके परिजनों ने ‘राम का हित सोचने वाला’ (रामहित) रखा था, चुनाव आयोग के ‘चमत्कारी’ सॉफ्टवेयर ने उन्हें सीधे किसी एफआईआर (FIR) की कहानी का पात्र बना दिया।

यह भी पढ़ें: नहीं साइन करूंगी पीस बॉन्ड’: मोदी सरकार पर भड़कीं AISA अध्यक्ष Neha Bora

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विपक्ष का हमला, वीडियो वायरल होने के बाद जागा आयोग

जब सोशल मीडिया पर इस अजीबो-गरीब ट्रांसलेशन के स्क्रीनशॉट और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे और विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेकर चुनाव आयोग के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल दागने शुरू किए, तब जाकर कहीं आयोग की नींद टूटी। चौतरफा किरकिरी और बैकफुट पर आने के बाद आयोग के अधिकारियों की तरफ से सफाई और स्पष्टीकरण जारी किया गया।

अब जनता और राजनीतिक गलियारे यही सवाल पूछ रहे हैं कि जिस सॉफ्टवेयर के हाथ में देश के करोड़ों नागरिकों का वोटिंग अधिकार तय करने की कमान है, जब वह एक साधारण से नाम का अनुवाद करने में ‘राम’ को मारपीट से जोड़ सकता है, तो फिर मतदाता सूची में नाम जोड़ने और छांटने का काम यह किस ‘बुद्धिमत्ता’ से कर रहा होगा?

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