लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की राजनीति में हलचल काफी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी के कई विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं। लेकिन उन्होंने किसी भी विधायक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
अखिलेश यादव ने लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कई लोग संपर्क में हैं, लेकिन सवाल यह है कि उन्हें पार्टी में शामिल करने के बाद समायोजित कैसे किया जाए। उनके इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में नए सियासी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
BJP ने दावे को किया खारिज
अखिलेश यादव के बयान पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनके दावे को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा का कोई विधायक समाजवादी पार्टी में नहीं जाएगा।
इस तरह एक तरफ सपा नेतृत्व भाजपा विधायकों के संपर्क में होने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इस दावे को स्वीकार नहीं कर रही है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि
अखिलेश यादव के दावे में कितने विधायक शामिल हैं और क्या इनमें से कोई नेता भविष्य में पार्टी बदलता है।
राज्यसभा चुनाव के बीच बढ़ी चर्चा
अखिलेश यादव का यह बयान उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक गतिविधियों के बीच आया है। सपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है।
राज्यसभा चुनाव में विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। इसलिए चुनाव से पहले विधायकों की संख्या और उनका समर्थन राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी वजह से विधायकों के बीच संपर्क और संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर चर्चाएं भी तेज हो जाती हैं।
2027 के लिए सपा की तैयारी
अखिलेश यादव ने यह भी संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अपने सहयोगी दलों के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और गठबंधन के समीकरण तय करने में जुटे हुए हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं और 2027 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में चुनाव से पहले किसी भी बड़े नेता या विधायक का दल बदलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।
अभी दावे की पुष्टि बाकी
अखिलेश यादव के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा के वे कौन से विधायक हैं जो कथित तौर पर सपा के संपर्क में हैं। फिलहाल सपा की ओर से किसी विधायक का नाम या आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है।
इसलिए अभी इस बयान को राजनीतिक दावा ही माना जा सकता है। आने वाले दिनों में यदि कोई भाजपा विधायक सपा में शामिल होता है या सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करता है, तो स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है।
फिलहाल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव, संभावित गठबंधन और नेताओं के दल बदलने की चर्चाओं के बीच आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति में और हलचल देखने को मिल सकती है।


