उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब सिर्फ चुनावी घोषणापत्र और गंभीर जनसभाओं से काम नहीं चल रहा, बल्कि अब राजनीति भारतीय रसोइयों के स्वाद और सोशल मीडिया के ‘Gen-Z’ ट्रेंड्स तक पहुँच चुकी है। गुरुवार (1 अक्टूबर) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एकदम अलग और मज़ाकिया मिज़ाज में नज़र आए। देश की नई पीढ़ी यानी ‘Gen-Z’ का दिल जीतने और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा तंज कसने के लिए उन्होंने सड़कों पर गूंज रहे नारों को सीधे खाने की थाली से जोड़ दिया।

सियासी माहौल में चटकारा लगाते हुए और युवाओं को जोड़ने की वकालत करते हुए सपा प्रमुख ने कहा:
“आने वाले समय में Gen Z और PDA मिलकर बीजेपी का पत्ता साफ कर देंगे। दिल्ली में आपने सुना होगा— एक कचौड़ी, दो समोसा… बीजेपी पर नहीं भरोसा!”
— अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
पीएम मोदी के ‘Gen-Z सम्मेलन’ पर चुटकी लेते हुए और अपनी भावी रणनीतियों के बारे में उन्होंने आगे कहा:
“हमने तो सिर्फ भजन जैमिंग की बात कही थी, किसी ने सुनके कर दिया! अब हम जल्द ही नौजवानों के लिए कार्यक्रम करेंगे और उनके लिए मैनिफेस्टो में बहुत कुछ होगा।”
— अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
डिग्रियां हाथ में और सलाह ई-रिक्शा की: BJP का ‘अनोखा’ रोजगार मॉडल
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य को लेकर बीजेपी सरकार का क्या दृष्टिकोण है, इसकी बानगी हाल ही में राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के एक बयान में देखने को मिली थी। युवाओं को बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल करने के बाद भी नौकरी न मिलने की कड़वी सच्चाई को छिपाते हुए डिप्टी सीएम ने एक ‘नायाब’ रोजगार मंत्र दे डाला था:
“नौकरी खोजने के बजाय अपना ई-रिक्शा चलाओ और पैसे कमाओ। इससे अपने परिवार और बच्चों को जब मन समय दे सकोगे। अगर किसी और की नौकरी करोगे तो अपने बच्चों को समय कहां दे पाओगे?”
— ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
युवाओं को ई-रिक्शा चलाने की सलाह देने वाले इस अद्भुत ‘सरकारी विज़न’ पर अखिलेश यादव ने करारा प्रहार किया। स्वास्थ्य विभाग की बदहाली और डिप्टी सीएम के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये को एक्सपोज करते हुए सपा प्रमुख ने कहा:
— अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
मीम्स, नारों और तंज के भरोसे 2026 का चुनावी दंगल
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव के इस नए रूप ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब पारंपरिक बहसों का दौर पीछे छूट रहा है। एक तरफ जहां सत्तापक्ष युवाओं को डिग्रियों के बदले ई-रिक्शा का हैंडल थमाने की बात कर रहा है, वहीं विपक्ष कचौड़ी-समोसे के ट्रेंडी स्लोगन्स से युवाओं का ध्यान खींच रहा है। बीजेपी का यह ‘ई-रिक्शा मॉडल’ युवाओं के गुस्से को भड़काने के लिए काफी है, जिसे अखिलेश यादव ने सीधे Gen-Z और PDA का मुद्दा बनाकर सत्तापक्ष के खिलाफ एक बड़े सियासी हथियार में तब्दील कर दिया है।


