उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी से सख्त मोड में आ गई है। 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले अप्रत्याशित राजनीतिक झटके के बाद पार्टी हाईकमान इस बार राज्य में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं दिख रहा है। अंदरूनी सूत्रों और हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी अपने करीब 255 में से 100 से भी अधिक मौजूदा विधायकों के टिकट काटने की रणनीति पर काम कर रही है।
शीर्ष नेतृत्व का स्पष्ट संदेश है कि इस बार टिकट बंटवारे में किसी नेता की सिफारिश या आपसी पसंद-नापसंद नहीं चलेगी, सिंबल सिर्फ और सिर्फ एक ही शर्त पर मिलेगा—’जीतने की क्षमता’ (Winnability)।

2024 के झटके से सबक: ‘अपनों की गुटबाजी’ और ‘रिपीट थ्योरी’ पड़ी थी भारी
बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को नेताओं के आपसी टकराव और अति-आत्मविश्वास का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा था।
- सीटों का नुकसान: 2019 में यूपी की 80 में से 62 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2024 में घटकर महज 36 सीटों पर सिमट गई।
- वोट शेयर में गिरावट: पार्टी का वोट शेयर 49.6% से गिरकर 41.4% पर आ गया।
- सांसदों को रिपीट करने का दांव फेल: 2024 के चुनाव में पार्टी ने 49 सांसदों को दोबारा मैदान में उतारा था, जिनमें से 27 उम्मीदवार हार गए। वहीं, तीसरी बार या उससे अधिक बार चुनाव लड़ रहे 33 सांसदों में से 20 को हार का सामना करना पड़ा।
- दिग्गजों की हार: स्मृति ईरानी, संजीव बालियान, महेंद्र नाथ पांडेय, अजय मिश्रा टेनी, कौशल किशोर, मेनका गांधी और सुब्रत पाठक जैसे बड़े चेहरे अपनी सीटें नहीं बचा सके।
एंटी-इंकंबेंसी और भीतरघात से निपटने की नई रणनीति
आंतरिक समीक्षाओं से यह बात सामने आई है कि कई सीटों पर स्थानीय स्तर पर मौजूदा जन प्रतिनिधियों के खिलाफ जनता और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी (Anti-Incumbency) थी। इसके अलावा, अंदरूनी खींचतान, दिल्ली और लखनऊ के बीच टिकट बंटवारे को लेकर रही खटपट और कार्यकर्ताओं की उदासीनता ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया।
इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए पार्टी संगठन स्तर पर बड़े बदलाव कर रही है:
- संगठनात्मक दौरे: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन के शीर्ष नेता लगातार मंडलों का दौरा कर विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं।
- तीन-स्तरीय सर्वे: निजी एजेंसियों और संगठन के माध्यम से हर विधानसभा सीट पर 3 स्तरों (संगठन की राय, जनता का फीडबैक और विपक्षी उम्मीदवार की काट) पर सर्वे कराया जा रहा है।
- युवाओं और महिलाओं पर दांव: एंटी-इंकंबेंसी को काटने और नए वोट बैंक को साधने के लिए इस बार बड़ी संख्या में नए चेहरों, युवाओं और महिलाओं को मौका देने की योजना है।
क्या है बीजेपी का आगे का प्लान?
बीजेपी जानती है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी तरह की ढिलाई विपक्षी दलों (विशेषकर सपा के PDA गठबंधन) को नया सियासी ऑक्सीजन दे सकती है। नए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के बाद बूथ स्तर की कमेटियों को पुनर्गठित किया जा रहा है।
पार्टी का स्पष्ट रुख है कि जो विधायक जनता के बीच अलोकप्रिय हो चुके हैं या जिनका प्रदर्शन कमजोर है, उनका पत्ता कटना तय है। सिर्फ रिपोर्ट कार्ड में ‘पास’ होने वाले नेताओं को ही 2027 के महासमर में बीजेपी का सिंबल दिया जाएगा।


