लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी तौर पर काफी अहम माना जा रहा है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए सात सीटों पर मजबूत स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटें जीतने की स्थिति में है। ऐसे में बची हुई सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
इस चुनाव में एक राज्यसभा सीट के लिए पहली वरीयता के 37 वोटों की जरूरत है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल 396 विधायक हैं, क्योंकि सात सीटें रिक्त हैं। यही वजह है कि 10वीं सीट के लिए दोनों प्रमुख खेमों को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ सकती है।
सपा ने दो उम्मीदवार उतारे
समाजवादी पार्टी ने रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया। हालांकि पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि तीसरे उम्मीदवार को लेकर फैसला संख्या और समर्थन का आकलन करने के बाद किया जाएगा।
सपा के सामने चुनौती यह है कि तीसरी सीट के लिए उसे अपने मौजूदा संख्या बल से अतिरिक्त विधायकों का समर्थन हासिल करना होगा। इसी वजह से भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कुछ विधायकों के संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि किसी विधायक के क्रॉस वोट करने की बात अभी भविष्य की संभावना है, इसे निश्चित तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता।
भाजपा के सामने भी आठवीं सीट की चुनौती
दूसरी तरफ भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए मौजूदा संख्या के आधार पर सात सीटों पर मजबूत स्थिति में है। आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। भाजपा की ओर से उम्मीदवारों को लेकर मंथन जारी है और पार्टी संगठन विधायकों के साथ बैठकें कर चुनावी रणनीति पर चर्चा कर रहा है।
यही वह स्थिति है जहां 10वीं सीट का चुनाव दिलचस्प बनता है। दोनों खेमों के पास अपने-अपने मजबूत संख्या बल हैं, लेकिन अतिरिक्त सीट के लिए उन्हें दूसरे खेमे या छोटे दलों के विधायकों का समर्थन जुटाने की कोशिश करनी पड़ सकती है।
क्रॉस वोटिंग पर रहेगी नजर
पिछले राज्यसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में क्रॉस वोटिंग चर्चा का विषय रही थी। इस बार भी दोनों खेमों की नजर ऐसे विधायकों पर है जिनके रुख से चुनावी गणित बदल सकता है। मीडिया रिपोर्टों में दोनों पक्षों की ओर से दूसरे दलों के विधायकों के समर्थन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, लेकिन मतदान से पहले इन दावों की पुष्टि संभव नहीं है।
अब सभी की नजर 6 अक्टूबर तक होने वाले नामांकन और उसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर पर है। 16 अक्टूबर को मतदान होगा। इसके बाद ही साफ होगा कि अतिरिक्त सीट के लिए किस खेमे को कितने विधायकों का समर्थन मिला।


