धनबाद सदर अस्पताल के बंद गेट को खोलने की तैयारी, एंबुलेंस को जाम से मिलेगी राहत; मरीजों के लिए खर्च होंगे 30 लाख रुपये
धनबाद | रोगी कल्याण समिति की बैठक में अस्पताल की सुविधाओं, डॉक्टरों की कमी, अधूरे बाउंड्रीवॉल और 108 एंबुलेंस कर्मियों के आंदोलन पर हुई चर्चा
धनबाद। सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और आपात स्थिति में पहुंचने वाली एंबुलेंस की परेशानी दूर करने के लिए अस्पताल प्रबंधन स्तर पर कई मुद्दों पर पहल करने की बात सामने आई है। अस्पताल तक पहुंचने वाले संकरे रास्ते पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए बंद पड़े गेट को खोलने पर जोर दिया गया। इसके अलावा मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर बनाने, चिकित्सकों की कमी दूर करने और अधूरे बाउंड्रीवॉल का निर्माण पूरा कराने को लेकर भी चर्चा हुई।
बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय स्थित सभागार में आयोजित रोगी कल्याण समिति की बैठक में एक अहम निर्णय लेते हुए आयुष्मान योजना से प्राप्त 30 लाख रुपये की राशि मरीजों से संबंधित सेवाओं पर खर्च करने पर सहमति बनी। बैठक में अस्पताल की जरूरतों और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विचार किया गया।
बंद गेट खुलने से एंबुलेंस को मिल सकती है राहत
सदर अस्पताल तक पहुंचने के रास्ते में जाम की समस्या बैठक का प्रमुख मुद्दा रही। रास्ता संकरा होने के कारण कई बार एंबुलेंस को अस्पताल तक पहुंचने में परेशानी होती है। आपातकालीन स्थिति में ऐसी बाधा मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में चुनौती पैदा कर सकती है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के बंद गेट को खोलने की पहल पर जोर दिया गया। इससे एंबुलेंस के आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, गेट खोलने की व्यवस्था लागू होने के बाद ही इसके वास्तविक परिणाम सामने आएंगे।
डॉक्टरों की कमी दूर करने और बाउंड्रीवॉल पूरा कराने पर जोर
बैठक में सदर अस्पताल के विभिन्न विभागों में चिकित्सकों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए इस समस्या का समाधान जरूरी बताया गया। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में अधूरे पड़े बाउंड्रीवॉल के निर्माण को जल्द पूरा कराने पर चर्चा हुई।
निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई।
108 एंबुलेंस कर्मियों के आंदोलन का समाधान निकालने की कोशिश
108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े चालकों और कर्मचारियों की मांगों तथा बकाया वेतन को लेकर चल रहे आंदोलन का विषय भी बैठक में सामने आया। एंबुलेंस सेवा प्रभावित होने की स्थिति में मरीजों को होने वाली परेशानी को देखते हुए अधिकारियों के स्तर पर मामले का समाधान निकालने पर चर्चा की गई।
समिति का ध्यान इस बात पर रहा कि जरूरतमंद मरीजों को आपातकाल में एंबुलेंस उपलब्ध कराने में किसी तरह की बाधा नहीं आए।
एक साल बाद बैठक, अब हर तीन महीने में समीक्षा पर जोर
रोगी कल्याण समिति की बैठक लगभग एक वर्ष के अंतराल पर आयोजित होने को लेकर समिति की अध्यक्ष सह जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल की समस्याओं, संसाधनों और मरीजों को मिल रही सुविधाओं की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक तीन महीने पर बैठक आयोजित करने पर जोर दिया।
अस्पताल की आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा उपकरणों और मशीनों की खरीदारी के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक की अध्यक्षता शारदा सिंह ने की। इसमें मेयर संजीव सिंह, प्रभारी सिविल सर्जन सह सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार प्रसाद, डीआरसीएचओ डॉ. रोहित गौतम, स्थानीय विधायक के प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और चिकित्सक मौजूद रहे।
एमएनसीयू और एमटीसी की व्यवस्थाओं का लिया जायजा
बैठक समाप्त होने के बाद समिति के सदस्यों ने सदर अस्पताल के एमएनसीयू और एमटीसी का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई।
अब अस्पताल के बंद गेट को खोलने, बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और मरीजों पर 30 लाख रुपये खर्च करने से संबंधित पहल पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। इन कदमों का उद्देश्य अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और आपातकालीन सेवाओं को सुचारु बनाना है।


