लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी दौरों और घोषणाओं को लेकर चुनाव आयोग से निगरानी की मांग की है। सपा का आरोप है कि सरकारी कार्यक्रमों के जरिए शिक्षक और स्नातक वर्ग के मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आदर्श आचार संहिता का पालन कराने की अपील की है।
श्याम लाल पाल ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मांग की है कि चुनाव के दौरान सरकारी कार्यक्रमों और घोषणाओं की निष्पक्ष निगरानी की जाए, ताकि किसी भी पक्ष को अनुचित लाभ न मिले।
सपा का कहना है कि चुनाव की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता का पालन सभी संबंधित पक्षों के लिए जरूरी है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से मामले की जांच कराने और नियमों के अनुसार आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
हालांकि, सरकारी कार्यक्रमों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप सपा की ओर से लगाया गया है। इस आरोप की पुष्टि संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जांच के बाद ही हो सकती है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी की मांग
सपा ने चुनाव आयोग से मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगामी सरकारी कार्यक्रमों, दौरों और जनसभाओं की वीडियोग्राफी कराई जाए। पार्टी चाहती है कि यह प्रक्रिया आयोग की निगरानी में हो, ताकि कार्यक्रमों में दिए गए बयानों और की गई घोषणाओं की जरूरत पड़ने पर जांच की जा सके।
पार्टी के मुताबिक, चुनाव के दौरान निगरानी की व्यवस्था मजबूत रहने से पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। सपा ने यह भी मांग की है कि कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखा जाए और जरूरत पड़ने पर उसकी समीक्षा की जाए।
फुटेज की जांच और कार्रवाई की मांग
समाजवादी पार्टी ने वीडियो फुटेज की जांच कराने की मांग भी रखी है। पार्टी का कहना है कि रिकॉर्डिंग की समीक्षा करके यह देखा जाए कि कहीं आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है।
सपा ने मांग की है कि यदि जांच में नियमों की अनदेखी या मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित करने का प्रयास सामने आता है, तो चुनाव आयोग संबंधित पक्ष को नोटिस जारी करे और नियमानुसार कार्रवाई करे।
हालांकि, आयोग की ओर से किसी नोटिस या कार्रवाई की पुष्टि होने पर ही इसे खबर में तथ्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
MLC चुनाव में क्यों अहम है यह मुद्दा?
उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक वर्ग की विधान परिषद सीटों के चुनाव को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय हैं। इन चुनावों में संबंधित वर्गों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार, सरकारी कार्यक्रमों और आदर्श आचार संहिता के पालन से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।
चुनाव के दौरान सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और मतदाताओं को प्रभावित करने से जुड़े आरोपों की जांच करना निर्वाचन अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, केवल सरकारी कार्यक्रम आयोजित होना अपने आप में आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। इसका आकलन कार्यक्रम की प्रकृति और लागू चुनावी नियमों के आधार पर किया जाता है।
अब चुनाव आयोग के रुख पर नजर
समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों की निगरानी, वीडियोग्राफी और फुटेज की जांच की मांग की है। अब इस मामले में चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
फिलहाल, सपा के आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आयोग की जांच या आधिकारिक आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि किसी कार्यक्रम में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
यूपी MLC चुनाव से पहले सपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी दौरों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है।


