उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। लखनऊ खंड स्नातक सीट पर इस बार मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह को दोबारा मैदान में उतारा है, जबकि समाजवादी पार्टी ने कांति सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। खास बात यह है कि दोनों चेहरे 2020 के चुनाव में भी आमने-सामने रह चुके हैं। हालांकि उस समय कांति सिंह निर्दलीय प्रत्याशी थीं, जबकि इस बार वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं।
2020 में बेहद करीबी मुकाबला
साल 2020 के लखनऊ स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा के अवनीश कुमार सिंह और निर्दलीय कांति सिंह के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। मतगणना के शुरुआती दौर में कांति सिंह कई चरणों तक बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के राउंड में अवनीश कुमार सिंह ने बढ़त बना ली। अंतिम परिणाम में अवनीश कुमार सिंह को 39,588 वोट मिले, जबकि कांति सिंह को 33,185 वोट मिले। इस तरह अवनीश कुमार सिंह ने 6,403 वोटों के अंतर से चुनाव जीत लिया था।
कांति सिंह उस समय लखनऊ स्नातक सीट से निवर्तमान एमएलसी थीं। उन्होंने 2014 से 2020 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 2020 में उन्होंने एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव के दौरान मतगणना को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच काफी गहमागहमी देखने को मिली थी।
इस बार बदला है राजनीतिक समीकरण
2026 के चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कांति सिंह अब निर्दलीय नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के आधिकारिक टिकट पर मैदान में हैं। सपा ने सितंबर में लखनऊ खंड स्नातक क्षेत्र से उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया। वहीं भाजपा ने मई में ही अवनीश कुमार सिंह को लखनऊ स्नातक सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था।
इस लिहाज से इस बार मुकाबला केवल दो पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच नहीं है, बल्कि इसके पीछे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है। सपा इस सीट पर कांति सिंह के पुराने चुनावी अनुभव और अपने संगठन के सहारे वापसी की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा लगातार दूसरी बार अवनीश कुमार सिंह को जीत दिलाकर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है।
सपा ने बढ़ाई जमीनी तैयारी
लखनऊ स्नातक सीट को लेकर समाजवादी पार्टी ने इस बार संगठनात्मक स्तर पर भी बड़ी तैयारी शुरू की है। पार्टी ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तर्ज पर पोलिंग स्टेशन स्तर तक प्रभारी और एजेंट लगाने की योजना बनाई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 1,720 पोलिंग स्टेशन प्रभारियों और एजेंटों की सूची तैयार की गई है।
वहीं भाजपा भी अपने मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह के साथ चुनावी मैदान में है। अवनीश कुमार सिंह का मौजूदा कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है और पार्टी ने उन्हें दोबारा मौका देकर अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने का भरोसा जताया है।
23 अक्टूबर को मतदान
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी हो चुका है। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित है। लखनऊ स्नातक समेत सभी संबंधित सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
अब देखना होगा कि 2020 में 6,403 वोटों से जीत दर्ज करने वाले भाजपा के अवनीश कुमार सिंह इस बार फिर बाजी मारते हैं या सपा की कांति सिंह पुराने मुकाबले का हिसाब बराबर करते हुए लखनऊ स्नातक सीट पर वापसी करती हैं। 2020 की पुरानी टक्कर में इस बार पार्टी का समीकरण भी जुड़ गया है, इसलिए लखनऊ स्नातक एमएलसी चुनाव का परिणाम राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


