नई दिल्ली: अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष Neha Bora ने शनिवार (24 अक्टूबर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली हाईकोर्ट से नोटिस के खिलाफ याचिका खारिज होने के बावजूद नेहा बोरा ने साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर ‘पीस बॉन्ड’ (Peace Bond) साइन नहीं करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रशासनिक नोटिस और पीस बॉन्ड के जरिए देश में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार को दबाने की कोशिश कर रही है।
“पीस बॉन्ड पर दस्तखत करना असहमति के अधिकार का सरेंडर होगा –Neha Bora“
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि दिल्ली पुलिस और विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा भेजा गया शांति बांड का नोटिस लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने कहा, “हमसे डेमोक्रेटिक डिसेंट (लोकतांत्रिक असहमति) का अधिकार छीना जा रहा है। हम इस उम्मीद के साथ इस पीस बॉन्ड को साइन नहीं करेंगे। इसे हम कोर्ट और सड़कों पर यूं ही चुनौती देते रहेंगे।” उन्होंने कहा कि यदि वह इस बांड पर हस्ताक्षर कर देती हैं, तो देश में यह गलत संदेश जाएगा कि किसी भी जायज और शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार इस प्रकार के बांड का सहारा ले सकती है।
“लोकतंत्र का मतलब सिर्फ वोट नहीं, अधिकारों की रक्षा के लिए बोलना भी है”
नेहा बोरा ने लोकतंत्र की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत जैसे बड़े देश में आम नागरिक लोकतंत्र के दो मुख्य आधार समझता है—पहला, निष्पक्ष तरीके से ‘राइट टू वोट’ (मतदान का अधिकार) और दूसरा, नागरिकों के अधिकारों पर हमला होने पर अपनी बात मजबूती से रखने का अधिकार। उन्होंने आरोप लगाया कि आज सरकार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर देश के करोड़ों आम लोगों से उनका वोट देने का मूल अधिकार छीन रही है।
voter लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटाने और SIR प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
AISA अध्यक्ष ने दावा किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बहाने 13 करोड़ लोगों को इलेक्टोरल रोल (मतदाता सूची) से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो चीज किसी देश को असली लोकतंत्र बनाती है, वह है निष्पक्ष चुनाव। लेकिन आज चुनाव प्रक्रिया को ही अलोकतांत्रिक बना दिया गया है। उन्होंने पूरे देश में एसआईआर (SIR) पर तुरंत रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को दोहराया।
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“शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठियां बरसाईं”
Neha Bora ने आरोप लगाया कि सड़कों पर उतरने वाले आम नागरिकों और छात्रों ने कोई भी असंवैधानिक काम नहीं किया, बल्कि हिंसा पुलिस प्रशासन की तरफ से हुई। Neha Bora ने कहा कि शांति बनाए रखने की आड़ में महिलाओं के कपड़े फाड़े गए, पत्रकारों और आम लोगों पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन करोड़ों लोगों का नाम मतदाता सूची से गायब कर दिया गया, क्या उनका चुप रहना ही सरकार के लिए ‘शांति’ है? उन्होंने साफ किया कि जनता के अधिकारों पर डाका डालने के खिलाफ सवाल पूछना कोई अशांति फैलाना नहीं है।


