लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था को लेकर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर सवाल उठाए हैं। 17 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘बारह साल, बारह सवाल’ शीर्षक से पोस्ट करते हुए उन्होंने बैंकिंग सेवाओं, ग्राहकों की समस्याओं, कर्ज और साइबर ठगी जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि यदि देश की बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है, तो आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है? उनके सवालों में गरीबों के खातों से कटने वाले शुल्क, बार-बार केवाईसी कराने की समस्या और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाओं तथा एटीएम की उपलब्धता जैसे मुद्दे शामिल हैं।
बैंक खातों से कटने वाले पैसे पर उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने पूछा कि बैंकों के मजबूत होने के दावों के बावजूद गरीबों और आम ग्राहकों के खातों से पैसे क्यों काटे जा रहे हैं। उन्होंने बार-बार केवाईसी (KYC) कराने के दौरान ग्राहकों को होने वाली परेशानियों पर भी सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने बड़े कर्ज लेकर देश से बाहर जाने वाले कर्जदारों के खिलाफ कार्रवाई और ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाओं तथा एटीएम की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि बैंकिंग सेवाओं का लाभ आम जनता तक आसानी से पहुंचना चाहिए।
किसानों, छात्रों और छोटे कारोबारियों के कर्ज का मुद्दा
अखिलेश यादव ने किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को कर्ज मिलने में होने वाली कठिनाइयों पर भी सवाल किया। उन्होंने पूछा कि इन वर्गों को बिना बिचौलियों और गारंटर के आसानी से ऋण क्यों नहीं मिल पाता।
उन्होंने होम लोन और एजुकेशन लोन की ब्याज दरों को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, कर्ज लेने वाले आम लोगों के सामने ब्याज और भुगतान से जुड़ी चुनौतियां हैं। हालांकि, इन सवालों के आधार पर सभी बैंकों की ऋण प्रक्रिया या ब्याज दरों के बारे में एक समान निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
साइबर ठगी और डिजिटल लेनदेन पर भी सवाल
सपा अध्यक्ष ने साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों को पैसा वापस मिलने में होने वाली देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि ठगी के बाद पीड़ितों को बैंक और पुलिस के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होने पर ग्राहकों के पैसे अटकने और सिबिल स्कोर में छोटी-सी चूक के कारण युवाओं को कर्ज मिलने में होने वाली परेशानी पर भी सवाल किया।
अखिलेश यादव ने बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे लोगों को यूपीआई तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाने के लिए बैंक शाखाओं में सहायता की बेहतर व्यवस्था करने की जरूरत पर जोर दिया।
बैंक कर्मचारियों की भर्ती और काम के दबाव का मुद्दा
अखिलेश यादव ने बैंक कर्मचारियों की मांगों, नई भर्तियों और मौजूदा कर्मचारियों पर बढ़ते काम के दबाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हुई है, तो ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिए कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही।
उनके 12 सवालों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच, ग्राहकों के अधिकार, ऋण की उपलब्धता और डिजिटल सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
अब सरकार के जवाब पर नजर
अखिलेश यादव के इस बयान ने बैंकिंग व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इन सवालों पर जवाब मांगा है। हालांकि, उनके द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और आरोपों की स्वतंत्र जांच तथा संबंधित सरकारी आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग पड़ताल जरूरी है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


