नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर देश की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बयान पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे भारतीय राजनीति की गरिमा के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
खरगे ने मंच से क्या कहा?
यह मामला 25 अक्टूबर 2026 को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खरगे संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने आवाज लगाई कि “मोदी नहीं जाएगा।”
इस पर खरगे ने जवाब देते हुए कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में हंगामा हुआ और राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा।
राजनाथ सिंह ने जताई नाराजगी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 26 अक्टूबर को खरगे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के बारे में कही गई बात से उन्हें गहरा दुख और आश्चर्य हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस जैसी पुरानी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस तरह की भाषा की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना, फैसलों की आलोचना करना और राजनीतिक विरोध करना पूरी तरह उचित है। लेकिन विरोध करते समय व्यक्तिगत मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता बयान पर खेद व्यक्त करने के बजाय उसका बचाव कर रहे हैं। राजनाथ सिंह के मुताबिक, इस तरह की टिप्पणियां राजनीतिक माहौल को प्रभावित करती हैं और लोगों की भावनाओं को आहत कर सकती हैं।
बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा
खरगे के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया। बीजेपी ने टिप्पणी को अनुचित बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष से माफी मांगने की मांग की। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियों तक नहीं ले जाना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस की ओर से इस विवाद पर अलग स्पष्टीकरण सामने आया है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने दावा किया कि खरगे की टिप्पणी का संदर्भ प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से था। इस दावे और बीजेपी की आपत्ति के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
राजनीतिक मर्यादा पर बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाली भाषा और नेताओं की जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों का राजनीतिक असर व्यापक हो सकता है।
खरगे की टिप्पणी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। राजनाथ सिंह ने इसे राजनीति की गरिमा से जुड़ा मामला बताया है, जबकि कांग्रेस की ओर से बयान का अलग अर्थ स्पष्ट किया गया है। अब देखना होगा कि यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव को कितना बढ़ाता है।


