वाराणसी: उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav आगामी 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। सपा की यह जनसभा वाराणसी जनपद के अकेलवां में दोपहर 12:00 बजे आयोजित की जाएगी। इस रैली के जरिए Akhilesh Yadav काशी से अपने चुनावी अभियान का आगाज कर रहे हैं, जिसका मुख्य फोकस पूर्वांचल में पटेल, ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता समीकरणों को अपने पाले में लाना है।
31 अक्टूबर को सरदार पटेल जयंती पर अकेलवां में महाजुटान
वाराणसी के अकेलवां में होने वाली इस मेगा रैली की तैयारियों का जिम्मा सपा के पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल को सौंपा गया है। जनसभा स्थल का जायजा लेने के दौरान सुरेंद्र पटेल ने बताया कि 31 अक्टूबर को ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। इस अवसर पर पटेल समाज के साथ-साथ सभी वर्गों के लोग Akhilesh Yadav के माध्यम से सरदार पटेल के विचारों को सुनेंगे। उन्होंने दावा किया कि वाराणसी के इतिहास में इतने बड़े पैमाने पर पहले कभी ऐसी रैली का आयोजन नहीं हुआ है और इसमें रिकॉर्ड भीड़ जुटने का अनुमान है।
BJP के गढ़ में जातीय समीकरण साधने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वाराणसी की रोहनिया, सेवापुरी, पिंडरा, शिवपुर और अजगरा जैसी विधानसभा सीटों पर पटेल मतदाताओं का जबरदस्त प्रभाव है। बीजेपी के सबसे मजबूत किले (वाराणसी) को चुनकर अखिलेश यादव धार्मिक ध्रुवीकरण के जवाब में सामाजिक व जातीय समीकरण की काट पेश करना चाहते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों के दौरान बीजेपी से पटेल वोटर्स की देखी गई दूरी को देखते हुए सपा इस वर्ग को मजबूती से अपने साथ जोड़ना चाहती है।
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ब्राह्मण और भूमिहार वोट बैंक पर भी सपा-कांग्रेस की नजर
इस रैली के जरिए सपा सिर्फ पटेल समुदाय ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल के ब्राह्मण और भूमिहार मतदाताओं को भी साधने की पूरी कोशिश में है। जनसभा में पूर्वांचल भर से समाजवादी पार्टी के विधायक और वरिष्ठ नेता शिरकत करेंगे। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय ने भी काशी में इस रैली का स्वागत किया है। अजय राय ने कहा कि न केवल पटेल समाज, बल्कि ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता भी अब पहले से कहीं अधिक संख्या में इंडिया (INDIA) गठबंधन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।


