मुंबई। मुंबई विश्वविद्यालय के कलीना परिसर स्थित शंकर राव चौहान भवन में दिनांक 7 दिसंबर 2024 को ग़ज़लकार अशोक कुमार नीरद के चौथे ग़ज़ल संग्रह ‘अंकुर बोलते है’ के लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। शिक्षाविद प्रो नंदलाल पाठक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस ग़ज़ल संग्रह पर परिचर्चा में डॉ हूबनाथ पांडे,राकेश शर्मा, डॉ अनिल गौड़, नवीन चतुर्वेदी, नवीन नवां व उबैद आज़मी उपस्थित रहे।वक्ताओं का मत रहा कि अशोक कुमार नीरद की ग़ज़लें विचार प्रधान हैं और उनमें हिंदी के देशज शब्दों का बड़ी ही खूबसूरती से प्रयोग किया गया है।इसके बाद ग़ज़लकार अशोक कुमार नीरद का एकल काव्य पाठ हुआ।उनके कुछ शेर ,
यह कैसा इंकलाब आया हुआ है राम जाने,
समुंदर प्यास के परचम को फहराने लगा है।
व्यर्थ है तुलना आस्थाओं की ,
राधा राधा है, मीरा मीरा है।
इस अवसर पर सभागार में साहित्यकार एन बी सिंह नादान, श्रीराम शर्मा,आनंद पांडे केवल, सतीश शुक्ला रकीब व नरेंद्र शर्मा ख़ामोश के अलावा नीरद के पारिवारिक सदस्य और छात्र -छात्राएं भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें उपस्थित सभी कवियों के अलावा कुछ छात्र – छात्राओं ने भी काव्य पाठ किया।

