CEC ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) को लेकर देश की सियासत में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन इस मुद्दे पर सरकार और निर्वाचन आयोग को कटघरे में खड़ा करने के लिए एकजुट हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने भी विपक्ष के हर हमले का आक्रामक तरीके से जवाब देने की पूरी तैयारी कर ली है। राजनीतिक दलों की इन गतिविधियों के बीच उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का एक बड़ा मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने भी तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल शुरू कर दिया है।
उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट गड़बड़ी का गंभीर मामला और चुनाव आयोग की त्वरित कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र से मतदाता सूची में बड़े स्तर पर अनियमितता पाए जाने के बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए सार्वजनिक किया कि क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के ईपीआईसी (EPIC) नंबर और क्रम संख्या को समान रखते हुए उनके नाम बदल दिए गए हैं। इसके साथ ही, लगभग 884 ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए जिनका वास्तविक अस्तित्व वहां मौजूद था, जबकि करीब 2,600 ऐसे नाम जोड़ दिए गए जो उस इलाके में निवास ही नहीं करते। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद निर्वाचन आयोग ने बिना किसी देरी के सख्ती दिखाई और संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा डेटा ऑपरेटर को मतदाता सूची के कार्यों से तुरंत हटा दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रणदीप रिणवा ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि वे आगामी दो दिनों के भीतर पूरे जिले की वोटर लिस्ट की सूक्ष्मता से जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।
‘इंडिया’ गठबंधन की आगामी उच्चस्तरीय बैठक और दिल्ली में होने वाली बड़ी रैली के मायने
विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन की होने जा रही आगामी बैठक को वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस उच्चस्तरीय मंथन में मुख्य रूप से आगामी 1 नवंबर को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाली विशाल रैली की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी प्रबल चर्चा है कि केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर ‘महिला आरक्षण अधिनियम’ को तेजी से लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा एक नया संविधान संशोधन विधेयक सदन में पेश कर सकती है। इन सभी संभावित विधायी कदमों और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की धार को तेज करने के लिए विपक्षी नेता लगातार रणनीति बना रहे हैं। इससे पहले 12 अक्टूबर को विपक्ष ने दिल्ली में ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाला था और एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की थी, जिसके बाद से तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आक्रामक रुख और बीजेपी का राष्ट्रव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान
विपक्ष के आक्रामक तेवरों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठनों ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जेल से रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका ने खुलकर कहा है कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हटना ही होगा, और संगठन जल्द ही मुंबई, दिल्ली तथा बेंगलुरु के बाद अपने अगले विरोध प्रदर्शन के प्लान का खुलासा करेगा। दूसरी तरफ, विपक्ष के इन तमाम आरोपों और चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों का माकूल जवाब देने के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने भी बड़ा कदम उठाया है। बीजेपी आज से आगामी 5 नवंबर 2026 तक पूरे देश में राष्ट्रव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान का संचालन करेगी, जिसके जरिए पार्टी जनता के बीच जाकर चुनावी प्रक्रियाओं की शुचिता, एसआईआर की पारदर्शिता और विपक्ष के दावों की असलियत को उजागर करेगी।


