– ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
कनाडा के कनानास्किस में 15-17 जून 2025 को आयोजित 51वें G7 शिखर सम्मेलन में नौ विश्व नेता मौजूद थे, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य मंच पर नजर नहीं आए। यह भारत की छठी लगातार G7 भागीदारी थी, जहां कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया था। G7 सदस्य देशों—कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान—और अन्य अतिथि नेताओं (जैसे यूक्रेन, दक्षिण अफ्रीका) के साथ मंच सजा, लेकिन मोदी की अनुपस्थिति ने चर्चा छेड़ दी। भारत-कनाडा के बीच तनाव और प्रोटोकॉल इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। एक्स पर कुछ यूजर्स ने इसे कूटनीतिक असफलता बताया, तो कुछ ने रणनीतिक कदम।
भारत और कनाडा के संबंध 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से तनावपूर्ण हैं। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों को भारत ने खारिज किया था। शुरुआत में खबरें थीं कि कनाडा ने मोदी को आमंत्रित नहीं किया, लेकिन G6 देशों के दबाव में कार्नी को निमंत्रण देना पड़ा। कनाडा में खालिस्तानी समर्थकों ने इस निमंत्रण का विरोध किया, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं। G7 में अतिथि देशों की भूमिका साइडलाइन बैठकों तक सीमित होती है, इसलिए मुख्य मंच पर मोदी का न होना प्रोटोकॉल का हिस्सा हो सकता है। भारत ने वैश्विक दक्षिण के मुद्दों और द्विपक्षीय वार्ताओं, जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ व्यापार चर्चा, पर ध्यान केंद्रित किया।
मोदी की मंच पर अनुपस्थिति को भारत की रणनीति से भी जोड़ा जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह यात्रा भारत-कनाडा संबंधों को रीसेट करने और वैश्विक मुद्दों पर भारत की स्थिति मजबूत करने का अवसर थी। 2024 में दोनों देशों के बीच 8.6 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ, जो संबंधों की अहमियत दर्शाता है। भारत ने मंच के बजाय साइडलाइन बैठकों में अपनी बात रखी, जो उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है।

