– ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर उम्मीदवारों में आक्रोश बढ़ रहा है। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी, उत्तर कुंजी न जारी करना, और कच्चे अंकों का खुलासा न होना प्रमुख मुद्दे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर #UnfairIBPS ट्रेंड कर रहा है, जहां उम्मीदवारों ने अपनी शिकायतें सामने रखीं। एक उम्मीदवार ने बताया कि 850 रुपये की फीस और जीएसटी देने के बाद भी परीक्षा के दौरान सिस्टम हैंग होने की समस्या आम है। इसके अलावा, मेन्स परीक्षा में 15 गुना उम्मीदवारों को बुलाने और नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया को अस्पष्ट रखने से असंतोष बढ़ा है। IBPS की प्रक्रिया RTI के दायरे में नहीं आती, जिससे जवाबदेही का अभाव है।
उम्मीदवारों का कहना है कि नॉर्मलाइज्ड स्कोर की गणना का कोई स्पष्ट फॉर्मूला नहीं बताया जाता, जिससे उनकी मेहनत पर सवाल उठते हैं। 2024 में IBPS RRB क्लर्क प्रीलिम्स के परिणाम 28 सितंबर को जारी हुए, और मेन्स परीक्षा 6 अक्टूबर को हुई, लेकिन इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। यह प्रणाली न केवल उम्मीदवारों का विश्वास तोड़ती है, बल्कि उनके भविष्य को भी अनिश्चित बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि IBPS को उत्तर कुंजी और स्कोर गणना की प्रक्रिया को सार्वजनिक करना चाहिए। उम्मीदवारों की मांग है कि सरकार और वित्त मंत्रालय इस मामले में हस्तक्षेप करें। #WeDeserveTransparency और #ReleaseRawScore जैसे हैशटैग के साथ यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।

