तेहरान/इस्लामाबाद (अखंड राष्ट्र न्यूज़): अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध को रोकने की तमाम अंतरराष्ट्रीय कोशिशें नाकाम साबित होती दिख रही हैं। मिडिल ईस्ट में सीजफायर (Ceasefire) कराने के लिए पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देशों द्वारा की जा रही मध्यस्थता को ईरान ने बड़ा झटका दिया है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
इस्लामाबाद में होने वाली बैठक से ईरान का इनकार
पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच कड़वाहट कम करने के लिए इस्लामाबाद में एक ‘शांति वार्ता’ की मेजबानी करने की पेशकश की थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि उनका देश इस सार्थक वार्ता में मदद देकर सम्मानित महसूस करेगा। लेकिन, ईरान ने मध्यस्थों को आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से नहीं मिलेगा। ईरान का मानना है कि अमेरिका की मांगें पूरी तरह से “अस्वीकार्य” हैं।
ईरान का कड़ा रुख: “15 पॉइंट का प्रस्ताव बेकार”
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की तरफ से 15 बिंदुओं का एक प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने “अवास्तविक और बेकार” बताकर खारिज कर दिया है। बाघई ने कहा, “अमेरिका की मांगें गलत और जरूरत से ज्यादा हैं। हम पाकिस्तान की कोशिशों का सम्मान करते हैं, लेकिन हम इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस युद्ध की शुरुआत किसने की थी, इशारा साफ तौर पर अमेरिका की तरफ था।
ट्रंप का दावा और जमीनी हकीकत
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि बातचीत में “बेहद अच्छी प्रगति” हो रही है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान संपर्क में हैं, लेकिन ईरान के ताजा इनकार ने ट्रंप के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर जो दबाव बना रहा है, उसे ईरान अपनी संप्रभुता के खिलाफ मान रहा है।
मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका को झटका
ईरान के इस फैसले से पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को भी गहरा धक्का लगा है। पाकिस्तान इस मामले में एक पुल (Bridge) की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा था, ताकि क्षेत्र में स्थिरता आए। लेकिन ईरान के हटने के बाद अब यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।
क्या अब जंग और तेज होगी?
बातचीत के दरवाजे बंद होने का सीधा मतलब है कि अब फैसला मैदान-ए-जंग में ही होगा। एक तरफ ट्रंप ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ और ‘स्टोन एज’ की धमकी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान समझौते की मेज पर आने को तैयार नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और भी हिंसक रूप ले सकता है।
