धनबाद | 17 मार्च 2026
झारखंड की पहली आठ लेन सड़क एक बार फिर धंस गई है, जिससे इसकी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 461.90 करोड़ रुपये की लागत से बनी 20 किलोमीटर लंबी इस सड़क में अब तक आठवीं बार धंसाव की घटना सामने आई है।
मंगलवार को झारखंड मोड़ से 99 कोयलांचल सिटी के बीच सर्विस लेन में अचानक बड़ा गड्ढा बन गया। बताया जा रहा है कि यह गड्ढा करीब तीन फीट चौड़ा और आठ फीट गहरा है। सड़क के नीचे भारी जलजमाव भी देखा गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया। मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और कई दोपहिया वाहन इस गड्ढे में गिरने से बाल-बाल बचे।
निर्माण एजेंसियों पर उठे सवाल
इस सड़क का निर्माण स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड (SAJ) द्वारा कराया गया है। परियोजना का काम दो एजेंसियों—शिवालय कंस्ट्रक्शन और त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन—को सौंपा गया था।
• गोल बिल्डिंग से बिनोद बिहारी महतो चौक (11.70 किमी): शिवालय कंस्ट्रक्शन
• बिनोद बिहारी महतो चौक से कांकोमठ (9.30 किमी): त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन
जहां हालिया धंसाव हुआ है, वह हिस्सा त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन द्वारा निर्मित बताया जा रहा है। लगातार हो रही घटनाओं के बाद दोनों कंपनियों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
उद्घाटन के बाद से ही समस्या
इस सड़क का उद्घाटन 5 अक्टूबर 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उद्घाटन के 24 घंटे के अंदर ही असर्फी अस्पताल के सामने पहली बार सड़क धंस गई थी। इसके बाद से हर 3-4 महीने में अलग-अलग जगहों पर धंसाव होता रहा है।
कब-कब धंसी सड़क
• अक्टूबर 2024: उद्घाटन के 24 घंटे के भीतर पहली घटना
• 2024: भूली ओवरब्रिज से बिनोद बिहारी चौक के बीच 4 बार धंसाव
• 2024: मेमको मोड़ के पास गड्ढा
• सितंबर 2025: राजा तालाब के पास बड़ा धंसाव (पाइपलाइन फटने से)
• मार्च 2026: झारखंड मोड़ के पास ताजा घटना
धंसाव की वजह क्या?
अधिकारियों के अनुसार, सड़क के नीचे से पेयजल विभाग की मेन राइजिंग पाइपलाइन गुजरती है। कई बार पानी का प्रेशर अधिक होने या वाल्व नियंत्रण में गड़बड़ी के कारण पाइपलाइन लीक या फट जाती है, जिससे सड़क के नीचे खालीपन बन जाता है और धंसाव हो जाता है।
डीजीएम, SAJ संजय कुमार सिंह ने बताया कि इस मुद्दे पर पेयजल विभाग के साथ पहले भी बैठक हो चुकी है और अब फिर से समन्वय कर समाधान निकाला जाएगा।
जनता में नाराज़गी
लगातार हो रहे धंसाव से आम लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। करोड़ों की लागत से बनी इस सड़क की बार-बार मरम्मत से सरकारी पैसे की बर्बादी और यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
निष्कर्ष:
राज्य की महत्वाकांक्षी परियोजना मानी जाने वाली यह 8 लेन सड़क अब गुणवत्ता और निगरानी दोनों के मामले में जांच के घेरे में है। यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह परियोजना सरकार और एजेंसियों की साख पर बड़ा असर डाल सकती है।

