परीक्षा परिणामॉं को लेकर….!
बालपन से आज तक….
उत्सुकता….रही ही रही है….
बालपन में पास होने की….
बचकानी सोच….और फिर कभी…
टॉप करने की काल्पनिक सोच…
बड़े होने पर….परीक्षा परिणाम में…
श्रेणी-स्थान के साथ….!
अखबार में नाम-फोटो देखने की…
उत्सुकता बनी ही रहती थी
नौकरी पाने के बाद भी मित्रों….!
यह उत्सुकता आज भी बनी हुई है,
क्योंकि पुरानी आदत अब भी…..!
मन-मस्तिष्क-रूह में बसी हुई है….
इसी कारण परीक्षाओं का परिणाम
आज भी उत्सुकता से देखता हूँ
इतना ही नहीं…..!
मन ही मन में यह विचार करता हूँ…
कि स्टूडेन्ट लाइफ में…..क्या मैं….?
मिसगाइडेड मिसाइल ही तो नहीं था
बिना अक्षांश और देशांतर को….
मिसाइल में फीड किए….और…
बिना टारगेट को….रीड किए ही…
हवा में….दाग तो नहीं दिया गया था
यह भी सोचता हूँ कि….!
वार हेड पर लोड भी….शायद…
सही रखा नहीं गया या…
इसीलिए ही….भौतिक जगत में…
अपेक्षा से थोड़ा कम ही पाया….
जो भी कल्पनाएं करी थी मैंने…
मुताबिक़ उसके…..आज….
वह ओहदा भी नहीं पाया…
यह अलग बात है कि…..
मिसाइल की तरह ही….
कई चरणों की परीक्षा के बाद….!
“नौकरी” वाली किसी कक्षा में….
आज चक्कर लगा रहा हूँ….और…
ऐतबार इस बात का है कि….!
चौड़े से दाल-रोटी खा रहा हूँ…
मित्रों….आप मानो न मानो….
परीक्षा परिणाम देखकर,
मैं तो…अफसोस तब भी करता था..
परिणाम…..किसी को बताने से….!
उन दिनों खूब डरता था….
फ़र्क अब भी कुछ विशेष नहीं है
बस इतना भर जानो प्यारे…..!
कि तब के दौर में…..!
मैं कुछ समझ नहीं पाया….और….
आज के दौर में….खुद को….
कुछ समझा नहीं पाया….
कि जो कुछ दिखता है समाज में…
वह सब तो प्यारे…..!
सिस्टम और समय की ही…
होती है सब माया…बस इसीलिए…
होती है कहीं धूप और कहीं छाया…
होती है कहीं धूप और कहीं छाया…
रचनाकार…..
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
