- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
लखनऊ | उत्तर प्रदेश के अपराध की दुनिया में एक बार फिर बड़ा धमाका हुआ है। मुख्तार अंसारी गैंग के कुख्यात शूटर शोएब किदवई उर्फ बॉबी की शुक्रवार दोपहर बाराबंकी में लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उसकी कार पर 15 से ज्यादा गोलियां दागीं, जिससे बॉबी मौके पर ही ढेर हो गया। अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि मुख्तार के पुराने गैंग और उसके विरोधियों के बीच चल रही पुरानी दुश्मनी का खुला ऐलान लग रही है।
हाईवे पर बाइक सवार हमलावरों ने घेरा और भून दिया
घटना बाराबंकी के असैनी इलाके में हुई, जब बॉबी लखनऊ से बाराबंकी की तरफ कार से जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, दो बाइक सवार हमलावरों ने उसकी कार को घेर लिया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग लगभग 10 मिनट तक चली, जिसमें 15-25 राउंड गोलियां चलीं। गवाहों ने बताया कि गोलीबारी की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा और लोग इधर-उधर भागने लगे। बॉबी को कई गोलियां लगीं, और वह कार में ही लहूलुहान हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इलाके को सील कर दिया और फॉरेंसिक टीम बुलाई।
बॉबी मुख्तार अंसारी का पुराना और भरोसेमंद शूटर था। वह 1999 के लखनऊ जेलर आरके तिवारी हत्याकांड में आरोपी था और हत्या, रंगदारी, गैंगवार जैसे कई गंभीर मामलों में नामजद था। मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसके गैंग में कई बदलाव आए, लेकिन बॉबी जैसे पुराने सदस्य अभी भी सक्रिय थे।
क्या UP में फिर छिड़ेगा बड़ा गैंगवार?
बॉबी की इस बेरहम हत्या ने पूर्वांचल और आसपास के इलाकों में सनसनी फैला दी है। विशेषज्ञों और पुलिस सूत्रों का मानना है कि यह हत्या मुख्तार गैंग के विरोधी गिरोहों की तरफ से की गई है, और इससे राज्य में जल्द ही बड़े पैमाने पर गैंगवार शुरू हो सकता है।
मुख्य कारण:
- माफिया और राजनीति का गठजोड़: आजकल गैंग सिर्फ बंदूकों से नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और सपोर्ट से भी लड़ते हैं। हर गिरोह चाहता है कि उसका नेता या समर्थक सत्ता में आए ताकि पुलिस और अदालत से बचाव हो सके। बॉबी की मौत से यह वैक्यूम और बढ़ गया है।
- पुरानी दुश्मनी और बदला: मुख्तार के पुराने शूटर और उनके विरोधी गैंग (जैसे बृजेश सिंह, अतीक-अशरफ के बचे हुए लोग या अन्य पूर्वांचल के डॉन) के बीच रंजिश चरम पर है। एक-दूसरे को खत्म करके अपना वर्चस्व कायम करने की होड़ तेज हो गई है।
- बदला लेने की तैयारी: बॉबी के समर्थक और उसके गैंग के बचे लोग अब पलटवार की योजना बना रहे हैं। आने वाले दिनों में और हत्याएं या हमले होने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस का ‘डबल गेम’ और स्वार्थ पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा पुलिस की भूमिका पर हो रही है। कई सूत्रों और अपराध विशेषज्ञों का आरोप है कि पुलिस अपने फायदे के लिए आग में घी डाल रही है:
- पुलिस पुराने अपराधियों को मुखबिर बनाकर इस्तेमाल करती है। वे एक गैंग की जानकारी देकर दूसरे को पकड़वाते हैं।
- इससे गिरोहों के बीच आपसी विश्वासघात और दुश्मनी और गहरी हो जाती है। पुलिस को तो जानकारी मिल जाती है, रिकॉर्ड सुधरता है, और प्रमोशन मिलता है—लेकिन सड़कों पर खून बहता है।
- बॉबी की हत्या भी इसी मुखबिरी और आपसी रंजिश का नतीजा मानी जा रही है। जब पुलिस अपराधियों को ही अपना हथियार बनाती है, तो कानून का डर खत्म हो जाता है और गैंगवार बढ़ता जाता है।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एसटीएफ ने रात में कई ठिकानों पर छापेमारी की और 3 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुराग जुटाए जा रहे हैं। बाराबंकी पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि जल्द ही हमलावरों को पकड़ा जाएगा।
आगे क्या?
बॉबी की मौत से UP में एक नया पावर वैक्यूम पैदा हो गया है। सवाल यह है कि क्या पुलिस इस गैंगवार को रोक पाएगी, या उनका मुखबिरी का जाल इस आग को और भड़काएगा? आम लोग डर में हैं कि कहीं पुराने दिनों की तरह हर गली-मोहल्ले में गोलीबारी न शुरू हो जाए। लोगो की सरकार और पुलिस से अपील है कि माफिया-पॉलिटिक्स नेक्सस पर सख्ती बरती जाए, वरना यूपी फिर से खून से रंग जाएगा।

