- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
सुल्तानपुर के अखंडनगर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गांव में चल रहे एक जमीनी विवाद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री राणा अजीत प्रताप सिंह को पुलिस ने उनके बेटे और करीब आधा दर्जन साथियों के साथ जेल भेज दिया है। इस घटना के बाद बीजेपी के भीतर ही आपसी गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
कल्याणपुर गांव में एक यादव परिवार के दो पक्षों के बीच संपत्ति को लेकर पुराना विवाद है। एक पक्ष पूर्व मंत्री राणा अजीत का करीबी है, जबकि दूसरे पक्ष को स्थानीय बीजेपी विधायक राज बाबू उपाध्याय का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। रविवार सुबह कब्जा करने की नीयत से हुई फायरिंग और मारपीट में आधा दर्जन लोग घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर है और वे लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं।
पुलिस अधीक्षक चारु निगम ने मामले में लापरवाही बरतने पर अखंडनगर एसएचओ संत कुमार सिंह को निलंबित कर दिया है और सीओ के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
अब ऐसे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक पुलिसकर्मी राणा अजीत की खातिरदारी करता नज़र आया, कि “खाना खाए कि नहीं” ऐसे में पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है
राणा अजीत सहित 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
इस गिरफ्तारी के बाद बीजेपी के भीतर की दरार खुलकर सामने आ गई है:
ऐसे में इस मामले में राजनैतिक बयानबाजी भी सामने आई जिसमें एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने राणा अजीत को निर्दोष बताते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने सीधे तौर पर सदर विधायक राज बाबू उपाध्याय पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने क्षेत्रीय वर्चस्व कायम करने के लिए राणा अजीत को फर्जी मामले में फंसाया है।
वही बात अगर पुलिस की कार्यवाही की हो तो इस पूरे मामले में पुलिस ने न केवल आरोपियों को जेल भेजा है, बल्कि उनके लाइसेंसी हथियारों को जब्त कर निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

