मुंबई। भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। बॉलीवुड के सबसे ऊर्जावान अभिनेता रणवीर सिंह अब सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस के ‘ग्लोबल आइकन’ बन चुके हैं। अपनी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की अभूतपूर्व सफलता के दम पर रणवीर ने वह कर दिखाया है जो आज तक कोई भारतीय मेल सुपरस्टार नहीं कर पाया। वह आधिकारिक तौर पर कोविड के बाद के दौर में 3000 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन करने वाले पहले भारतीय अभिनेता बन गए हैं।
महामारी के बाद की चुनौतियों को पछाड़ा
कोविड-19 के बाद जहाँ पूरी फिल्म इंडस्ट्री संघर्ष कर रही थी, वहीं रणवीर सिंह ने अपनी फिल्मों के चयन और कड़ी मेहनत से बॉक्स ऑफिस का रुख बदल दिया। उनके इस सफर की शुरुआत फिल्म ’83’ से हुई, जिसने वैश्विक स्तर पर ₹184.36 करोड़ की कमाई की। हालांकि ‘जयेशभाई जोरदार’ और ‘सर्कस’ जैसी फिल्मों ने उम्मीद के मुताबिक आंकड़े नहीं छुए, लेकिन रणवीर की अदाकारी की हमेशा तारीफ हुई।
‘रॉकी’ से मिली रफ़्तार, ‘धुरंधर’ ने बदला इतिहास
रणवीर के करियर ग्राफ में बड़ा उछाल करण जौहर की ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ से आया, जिसने दुनिया भर में ₹348.89 करोड़ का बिजनेस किया। लेकिन असली ‘गेम चेंजर’ साबित हुई 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’। इस फिल्म ने ₹1354.84 करोड़ बटोर कर तहलका मचा दिया।
अब ‘धुरंधर 2’ ने तो सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। फिल्म ने रिलीज के महज 8 दिनों में ही ₹1088.2 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। यह फिल्म अब भारत की अब तक की सबसे बड़ी हिट बनने की ओर मजबूती से बढ़ रही है।
शाहरुख खान और प्रभास को दी मात
बॉक्स ऑफिस की इस रेस में रणवीर सिंह ने इंडस्ट्री के दो सबसे बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर साफ हो जाती है:
| सुपरस्टार | पोस्ट-कोविड कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन |
| रणवीर सिंह | ₹3039.99 करोड़ |
| शाहरुख खान | ₹2704.07 करोड़ |
| प्रभास | ₹2393.29 करोड़ |
ये आंकड़े गवाह हैं कि रणवीर सिंह का स्टारडम इस समय अपने चरम पर है और उन्होंने बॉलीवुड के स्थापित समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
वर्सेटिलिटी की जीत
रणवीर सिंह की यह सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। ’83’ के कपिल देव से लेकर ‘धुरंधर’ के इंटेंस अवतार तक, उन्होंने हर किरदार में खुद को ढाला है। दर्शकों का यह अटूट विश्वास और 3000 करोड़ की यह ऐतिहासिक उपलब्धि उन्हें भारतीय सिनेमा का निर्विवाद ‘धुरंधर’ बनाती है।

