जौनपुर के सरपतहां थाना क्षेत्र में चोरी के आरोपी अजीत कुमार की जिला जेल में हुई संदिग्ध मौत के बाद पुलिस और जेल प्रशासन के बीच जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गलत गिरफ्तारी, एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने और हिरासत में मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन मामले के तकनीकी पहलुओं और बरामदगी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यदि गिरफ्तारी गलत थी तो आरोपी के पास से पीली धातु का लॉकेट, चांदी की पायल और नगदी जैसा चोरी का माल कैसे बरामद हुआ? साथ ही, रिश्वत के आरोपों के बीच पुलिस का तर्क है कि जिस व्यक्ति के पास से खुद भारी मात्रा में चोरी का सामान मिला हो, उसे छोड़ने के बदले सौदेबाजी का प्रश्न ही नहीं उठता। सबसे अहम बात यह है कि जेल भेजने से पूर्व हुए मेडिकल परीक्षण में मारपीट का कोई भी निशान या चोट सामने नहीं आई थी, जो पुलिस की कार्रवाई को नियमानुसार सही ठहराती है।
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिली जानकारी इस मामले में एक नया मोड़ दे रही है, जिसके अनुसार मृतक अजीत कुमार लंबे समय से नशे का आदी था और उसे पूर्व में एक बार लकवा (पैरालिसिस) का अटैक भी पड़ चुका था। उसकी गिरती सेहत और पुरानी बीमारियों के इतिहास के बावजूद जेल प्रशासन ने उसे दाखिल करते समय उसके स्वास्थ्य की सघन निगरानी क्यों नहीं की, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी का मेडिकल कराकर उसे सुरक्षित जेल की कस्टडी में सौंपा था, लेकिन जेल की चहारदीवारी के भीतर प्रवेश के महज 24 घंटे के भीतर उसकी मौत हो जाना सीधे तौर पर जेल प्रबंधन की घोर लापरवाही की ओर इशारा करता है। ऐसी घटनाओं में अक्सर पुलिस को निशाना बनाना एक चलन बन गया है, जबकि जेल के भीतर कैदी की सुरक्षा और सेहत की पूरी जिम्मेदारी वहां के प्रशासन की होती है।
इस पूरे प्रकरण में जेल अस्पताल की भूमिका और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि बंदी की स्थिति नशे या पुरानी बीमारी के कारण बिगड़ रही थी, तो उसे समय रहते किसी बड़े अस्पताल में रेफर क्यों नहीं किया गया? पुलिस द्वारा स्वस्थ हालत में जेल भेजे गए युवक की मृत्यु का उत्तरदायित्व अब पूरी तरह जेल प्रशासन के कंधों पर है। फिलहाल, मजिस्ट्रेट जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जो यह साफ करेगी कि जेल के भीतर आखिर ऐसी क्या चूक हुई जिसने एक युवक की जान ले ली। यह मामला एक बार फिर जौनपुर जिला जेल की आंतरिक व्यवस्थाओं और वहां कैदियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की कलई खोल रहा है।

