वाशिंगटन/तेहरान (अखंड राष्ट्र न्यूज़): दुनिया इस वक्त तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ी है, और इस महायुद्ध के केंद्र में हैं—अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। अपने बेबाक और अक्सर हैरान कर देने वाले फैसलों के लिए मशहूर ट्रंप ने एक बार फिर पूरी दुनिया के राजनयिकों को सोच में डाल दिया है। ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच, ट्रंप ने अचानक एक ऐसी ‘पलटी’ मारी है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।
ईरानी लोगों की ताकत के कायल हुए ट्रंप
टाइम मैगजीन को दिए एक विशेष इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपने कड़े रुख को नरम करते हुए वहां के नागरिकों की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा, “ईरानी लोग बहुत ही शक्तिशाली और दर्द सहन करने में सक्षम होते हैं। मैं उनका और उनकी संस्कृति का गहरा सम्मान करता हूं।” ट्रंप का यह बयान इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि कुछ ही दिन पहले तक वे ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की वकालत कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरानी लोग ‘लड़ाकू’ (Fighters) नहीं हैं, बल्कि वे दुनिया के सबसे बेहतरीन ‘बातचीत करने वाले’ (Negotiators) हैं। ट्रंप का इशारा साफ है कि वे अब युद्ध के बजाय समझौते की मेज पर ईरान को लाना चाहते हैं।
इजरायल और नेतन्याहू पर ट्रंप का ‘रिमोट कंट्रोल’
इस इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इजरायल के साथ अपने रिश्तों पर भी बड़ी बात कही। जब उनसे पूछा गया कि इजरायल इस जंग को कब रोकेगा, तो ट्रंप ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा— “इजरायल एक बेहतरीन टीम प्लेयर है। वे वही करेंगे जो मैं उनसे कहूंगा। जब मैं कहूंगा कि अब रुकने का समय है, तो वे रुक जाएंगे।”
यह बयान संकेत देता है कि बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली इजरायली सरकार और तेल अवीव का सत्ता केंद्र पूरी तरह से ट्रंप के संकेतों पर काम कर रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके एक आदेश पर सैन्य कार्रवाई रोकी जा सकती है, बशर्ते इजरायल को बिना वजह उकसाया न जाए।
क्या था ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’? (Operation Epic Fury)
बता दें कि इस पूरे तनाव की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी, जब राष्ट्रपति ट्रंप के सीधे निर्देश पर ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) लॉन्च किया गया था। इस खुफिया और बेहद घातक ऑपरेशन के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में आग लग गई थी।
टाइम पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के भीतर से कुछ अहम जानकारियां लीक हुई थीं, जिससे ट्रंप काफी नाराज थे। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने 27 फरवरी को एक बार इस ऑपरेशन को रोकने का भी संकेत दिया था, लेकिन अंततः मिशन को अंजाम दिया गया।
जंग के बीच समझौते की आहट?
ट्रंप ने इंटरव्यू में साफ कहा कि अब ईरान के साथ बातचीत करने का सही समय आ गया है। वे जल्द ही एक ऐसा समझौता (Deal) करना चाहते हैं जिससे क्षेत्र में स्थिरता आए। जानकारों का मानना है कि ट्रंप अपनी ‘डील मेकर’ वाली छवि को दोबारा जिंदा करना चाहते हैं। वे जानते हैं कि लंबे समय तक चलने वाला युद्ध अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उनकी ग्लोबल रेटिंग के लिए ठीक नहीं है।
बदलते बयानों के पीछे की राजनीति
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान को उनके पिछले रुख से अलग देखा जा रहा है। ‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ को दिए पिछले इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि युद्ध की समाप्ति का निर्णय वे और नेतन्याहू मिलकर लेंगे। लेकिन अब वे खुद को एक ‘शांतिदूत’ और ‘मास्टर कंट्रोलर’ के रूप में पेश कर रहे हैं।
विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है ताकि वे ईरान के भीतर आम नागरिकों का भरोसा जीत सकें और वहां की सरकार पर दबाव बना सकें।
