उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने और आरक्षण का लाभ देने की मांग एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद तथा विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय हैं। दोनों नेताओं की गतिविधियों से प्रदेश में निषाद समुदाय के समर्थन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
21 अक्टूबर को दिल्ली में आरक्षण की मांग को लेकर कार्यक्रम
निषाद पार्टी ने 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक बड़े कार्यक्रम की तैयारी की है। पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद ने कार्यकर्ताओं से इसमें बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। पार्टी का प्रमुख मुद्दा निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति में शामिल करने और आरक्षण का लाभ दिलाने की मांग है।
संजय निषाद का कहना है कि निषाद समुदाय को उसके अधिकार मिलने चाहिए। इस मांग के जरिए पार्टी समुदाय को संगठित करने और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
मुकेश सहनी की आरक्षण संकल्प यात्रा से बढ़ी हलचल
दूसरी ओर, VIP प्रमुख मुकेश सहनी उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा के जरिए समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। उनकी पार्टी का दावा है कि यात्रा के माध्यम से प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। सहनी ने आरक्षण की मांग पूरी नहीं होने पर BJP और उसके सहयोगियों के खिलाफ मतदान करने की अपील भी की है।
मुकेश सहनी ने संजय निषाद की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार में रहने के बावजूद निषाद समुदाय को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है।
क्या BJP के लिए चुनौती बन सकता है निषाद आरक्षण का मुद्दा?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समुदाय का अपना महत्व है। गंगा, यमुना, घाघरा और गोमती जैसी नदियों के आसपास के कई क्षेत्रों में इस समुदाय की राजनीतिक भागीदारी अहम मानी जाती है। ऐसे में आरक्षण की मांग आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।
BJP के साथ निषाद पार्टी गठबंधन में है, लेकिन आरक्षण की मांग को लेकर संजय निषाद का अपनी ही सरकार से अधिकार मांगना इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। वहीं, मुकेश सहनी की सक्रियता विपक्षी गठबंधन के लिए भी निषाद मतदाताओं तक पहुंच बनाने का अवसर हो सकती है।
अभी नहीं मिला है आरक्षण का नया फैसला
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग और आरक्षण मिलने का आधिकारिक निर्णय अलग-अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल नेता इस मांग को लेकर अभियान और कार्यक्रम चला रहे हैं। समुदाय को SC श्रेणी में शामिल किए जाने का नया फैसला घोषित होने की पुष्टि नहीं हुई है।


