सुरक्षित और स्मार्ट माइनिंग की ओर बड़ा कदम
– कृष्ण कुमार नोनिया (अखंड राष्ट्र)
धनबाद। ओपनकास्ट माइंस में चट्टानों को तोड़ने के लिए किए जाने वाले विस्फोट (ब्लास्टिंग) से कई तरह के खतरे पैदा होते हैं – जैसे तेज धमाके की आवाज, भूमि कंपन, उड़ते पत्थर, धूल और विषैले धुएं। इससे आसपास की इमारतों की दीवारों में दरारें, कांच टूटने का खतरा और लोगों के स्वास्थ्य पर असर होता है। अब इन खतरों को कम करने के लिए केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सिंफर), धनबाद के वैज्ञानिकों ने AI आधारित पूर्वानुमान मॉडल तैयार किया है।
33 खदानों से डेटा, 699 ब्लास्ट का अध्ययन
सिंफर की टीम ने देशभर की 33 खदानों से 699 ब्लास्ट डेटा एकत्र कर यह मॉडल बनाया है। इसमें छेद का व्यास, गहराई, संख्या, विस्फोटक की मात्रा, अंतराल, आवेश, दूरी जैसे 10 अलग-अलग पैरामीटर शामिल किए गए। इस आधार पर तैयार मॉडल अब ब्लास्टिंग के लिए सटीक डिजाइन और विस्फोटक की मात्रा पहले ही तय कर लेगा।
बार-बार ट्रायल की जरूरत खत्म, पर्यावरण को राहत
अभी तक ब्लास्टिंग से पहले कई बार ट्रायल करना पड़ता था, जिससे पर्यावरण पर भारी असर पड़ता था। लेकिन नया AI मॉडल ब्लास्ट से पहले ही यह अनुमान लगा लेगा कि वायु दबाव (Air Over Pressure) कितना होगा और किस डिजाइन से सबसे सुरक्षित परिणाम मिलेंगे। इससे न केवल पर्यावरणीय खतरा कम होगा, बल्कि खनन कार्य सुरक्षित और स्मार्ट भी हो जाएगा।
अमेरिकी जर्नल में मिला स्थान
इस शोध में नाइजीरिया के युवा रिसर्च स्कॉलर चार्ल्स कोमाड्जा भी शामिल थे। प्रोजेक्ट की सफलता के बाद उन्हें अमेरिका में रिसर्च स्कॉलर के रूप में अवसर मिला। इस शोध को अमेरिका की इंस्टीट्यूट ऑफ नॉइज कंट्रोल इंजीनियरिंग के जर्नल में भी स्थान मिला है।
खनन क्षेत्र और लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि विस्फोटक से सिर्फ 20-30% ऊर्जा चट्टान तोड़ने में काम आती है, बाकी ऊर्जा ध्वनि, कंपन और उड़ते पत्थरों में बर्बाद होती है। यह मानव स्वास्थ्य और संरचनाओं पर भारी असर डालती है। नया AI मॉडल इस ऊर्जा के इस्तेमाल को नियंत्रित करेगा, जिससे न केवल खदानों में काम करने वाले मजदूरों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि आसपास के गांव और बस्तियां भी सुरक्षित रहेंगी।
प्रोजेक्ट टीम
प्रोजेक्ट लीडर : डॉ. आदित्य राणा
डेटा संग्रह : डॉ. सी. सौम्लियाना
सहयोगी सदस्य : चार्ल्स कोमाड्जा, हेमंत अग्रवाल, आर.के. सिंह
प्रधान विज्ञानी डॉ. आदित्य राणा ने कहा –
“खनन में होने वाले विस्फोट से हवा का दबाव कई बार पर्यावरण और इंसानों के लिए गंभीर समस्या खड़ी करता है। हमारा AI मॉडल इस दबाव का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है। यह खदान प्रबंधन, इंजीनियरों और आसपास की बस्तियों – सभी के लिए कारगर साबित होगा।”

