ओमकार त्रिपाठी
नई दिल्ली, 4 जून 2025: भारतीय डाक विभाग ने ‘डिजिपिन’ (Digital Postal Index Number) नामक एक नई डिजिटल पता प्रणाली शुरू की है, जो पारंपरिक पिन कोड को और सटीक बनाने का वादा करती है। डिजिपिन, जिसे आईआईटी हैदराबाद और इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के सहयोग से विकसित किया गया है, भारत के हर 4×4 मीटर क्षेत्र को एक यूनिक 10-अंकीय अल्फान्यूमेरिक कोड देता है। यह प्रणाली डिलीवरी, आपातकालीन सेवाओं और डिजिटल शासन को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आइए, इसके निर्माण, उपयोग और महत्व को समझें।
डिजिपिन क्या है?
डिजिपिन एक जियो-कोडेड डिजिटल एड्रेसिंग सिस्टम है, जो भारत को 4×4 मीटर के ग्रिड में बांटता है। प्रत्येक ग्रिड को एक 10-अंकीय कोड मिलता है, जो अक्षांश और देशांतर पर आधारित है। यह पारंपरिक पिन कोड को पूरक बनाता है, जो बड़े क्षेत्रों को कवर करता है और सटीकता में कमी रह जाती है। डिजिपिन का लक्ष्य डिलीवरी और आपातकालीन सेवाओं को तेज और सटीक बनाना है।
डिजिपिन बनाने की प्रक्रिया
डिजिपिन को विकसित करने के लिए भारतीय डाक ने अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया। प्रमुख चरण इस प्रकार हैं:
तकनीकी सहयोग: डाक विभाग ने आईआईटी हैदराबाद और इसरो के NRSC के साथ मिलकर डिजिपिन बनाया, जो नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी 2022 के तहत है।
ग्रिड सिस्टम: भारत को 4×4 मीटर के ग्रिड में विभाजित किया गया। प्रत्येक ग्रिड को GPS-आधारित यूनिक कोड दिया गया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म: ‘Know Your DIGIPIN’ और ‘Know Your PIN Code’ पोर्टल्स लॉन्च किए गए, जहां उपयोगकर्ता GPS या अक्षांश-देशांतर दर्ज कर डिजिपिन प्राप्त कर सकते हैं।
ओपन-सोर्स: डिजिपिन का स्रोत कोड GitHub पर उपलब्ध है, जिसे विभिन्न मंत्रालय और संस्थान अपने सिस्टम में एकीकृत कर सकते हैं।
फीडबैक: डाक विभाग ने नागरिकों से इन पोर्टल्स पर फीडबैक मांगा है ताकि सिस्टम को बेहतर बनाया जा सके।
डिजिपिन का उपयोग
डिजिपिन प्राप्त करना आसान है
1 डाक विभाग की वेबसाइट पर ‘Know Your DIGIPIN’ पोर्टल खोलें।
2 GPS या अक्षांश-देशांतर दर्ज करें।
3 सिस्टम तुरंत 10-अंकीय डिजिपिन कोड जनरेट करेगा। इस कोड को डिलीवरी, नेविगेशन या आपातकालीन सेवाओं के लिए साझा किया जा सकता है।
डिजिपिन के लाभ
डिजिपिन कई क्षेत्रों में लाभकारी है
1.सटीक डिलीवरी: 4×4 मीटर की सटीकता से कूरियर और डिलीवरी सेवाएं तेज होंगी, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
2.आपातकालीन सेवाएं: एम्बुलेंस और अग्निशमन जैसी सेवाएं सटीक स्थान तक तुरंत पहुंच सकेंगी।
- डिजिटल शासन: ‘Address-as-a-Service’ के रूप में डिजिपिन सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग को बढ़ाएगा।
4.लागत बचत: पता त्रुटियों से होने वाला नुकसान कम होगा, जिससे सालाना 10-14 अरब रुपये की बचत हो सकती है। - ग्रामीण समावेशिता: सुदूर क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और सेवाओं की डिलीवरी आसान होगी।
- जियोस्पेशियल नवाचार: यह भारत को जियोस्पेशियल क्षेत्र में वैश्विक नेता बनने में मदद करेगा।
हाल की खबरें
27 मई 2025 को डाक विभाग ने ‘Know Your DIGIPIN’ और ‘Know Your PIN Code’ पोर्टल्स लॉन्च किए। डाक सचिव वंदिता कौल ने कहा, “डिजिपिन हर नागरिक को डिजिटल रूप से खोजने योग्य बनाएगा।” सोशल मीडिया पर इसे आधार और यूपीआई के बाद डिजिटल इंडिया की अगली उपलब्धि बताया जा रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
डिजिपिन डाक सेवाओं से आगे बढ़कर लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और आपातकालीन सेवाओं में क्रांति लाएगा। यह जियोस्पेशियल तकनीक के लिए आधार तैयार करेगा। डाक विभाग ने नागरिकों से पोर्टल्स का उपयोग और फीडबैक देने की अपील की है।

