व्यावसायिक शिक्षा विभाग में जून-2025 में स्थानांतरण में जो हुआ वो किसी से छुपा नहें है लेकिन स्थानान्तरण सत्र के बाद भी भ्रष्ट अधिकारियों और विभागीय मंत्री के मिलीभगत से मलाई काटने की तैयारी है| इसकी झलक स्थानान्तरण सत्र समाप्त होने के लगभग 12 दिन बाद ही शासन द्वारा लगभग 40 कर्मचारी/अधिकारियों की सूची तैयार कर निदेशक अभिषेक सिंह को भेजी जा चुकी है जिसे तैयार करने में विभाग के ही प्रमुख दलाल डी०के० सिंह, मानपाल सिंह, राजेंद्र प्रसाद मुख्य रूप में शामिल है। सूची इतनी जल्दबाज़ी में भेजी गई है कि इसमें किसी भी कर्मचारी का पदनाम अंकित नहीं है। ध्यान देने योग्य है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के आरोपों में मुख्यमंत्री योग आदित्यनाथ ने विभिन्न विभागों के लगभग 1000 स्थानान्तरण रद्द कर दिए हैं फिर भी उक्त अधिकारियों की हिम्मत और लालच की हद देखिए कि जो स्थानान्तरण 14 जून और 15 जून 2025 को निदेशक स्तर से किये गए हैं उनमें भी अगर कोई कसर रह गयी है तो उसे भी मंत्री स्तर से मनमाफिक जगह पुनः स्थानान्तरण किये जाने की योजना बन चुकी है। स्थानान्तरण सत्र समाप्ति के 12 दिन बाद 27 जून 2025 को शासन द्वारा जिन नामों पर आख्या माँगी गई है उनमें प्रमुख रूप से शालिनी राय, मनोज पांडेय, विवेक कुमार, अंकित कुमार, दुर्गेश विधेय, अभिषेक रंजन, वंदना शर्मा, निर्मला रानी, दीपिका शर्मा, दीपक कुमार, मृत्युंजय कुमार, अंशु गुप्ता, हरिशंकर सिंह, अरवीना रानी, देवेंद्र कुमार, विवेक लावनिया, श्रद्धा सुमन, ख्याति सिंह, मनीष पांडेय, नीतू चक्रवर्ती, सोनू पुण्डीर, मुकेश कुमार, मधुलिका गुप्ता, महेश कुमार, नीतू जयसवाल, विभा शर्मा, विजय कुमार, प्रदीप कुमार यादव, संजय सैनी, सौरभ भार्गव, अम्बुज कुमार, सुनील प्रजापति, शिव शंकर चौधरी, पूनम देवी, विपिन बिहारी कौशल, मनीष कुमार गोस्वामी, संगीता, आनंद कुमार, सुमन सरोज प्रजापति और कुछ अधिकारियों के नाम शामिल है। देखना यह है कि इन अधिकारियों/कर्मचारियों के नामों पर आख्या जाती है या नहीं। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इन भ्रष्ट अधिकारियों और विभागीय मंत्री की दुरभिसंधि पर संज्ञान लेता है अथवा मूक दर्शक बनकर देखता रहता है ।

