जौनपुर। नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज में इन दिनों लोकसंस्कृति की मिठास घोलने वाली खास कार्यशाला चल रही है। संगीत नाटक अकादमी और संस्कार भारती द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में परंपरागत लोकगीतों की अलग-अलग विधाएं सिखाई जा रही हैं, जिसमें सोहर, खेलवना, बधावा, देवी गीत और झूमर जैसे गीत प्रमुख हैं।
कार्यशाला की खास बात यह है कि इसमें जन्म संस्कार से जुड़ी लोकपरंपराओं पर खास फोकस किया जा रहा है। गांव की गलियों में गूंजने वाले वो गीत, जो अब सुनाई कम पड़ने लगे हैं, उन्हें फिर से जीवंत करने की कोशिश की जा रही है।
प्रशिक्षिका डॉ. ज्योति सिन्हा ने बताया कि यह कार्यशाला 23 मई से शुरू हुई थी और 11 जून तक चलेगी। उन्होंने बताया कि इसमें सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि संगीत में रुचि रखने वाले युवक-युवतियां भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यशाला का उद्देश्य नयी पीढ़ी को अपने लोकसंस्कृति से जोड़ना है ताकि हमारी परंपराएं केवल किताबों में ही न रह जाएं, बल्कि लोगों के दिलों और जीवन में जीवित रहें। रोजाना सुबह कॉलेज परिसर में लोकगीतों की गूंज सुनाई देती है, जिससे वहां का माहौल एकदम पारंपरिक और सांस्कृतिक हो गया है।
संस्कार भारती के इस प्रयास को लोग सराह रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि इस तरह की पहल से हमारी समृद्ध लोकधरोहर को नया जीवन मिलेगा।

