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Reading: 9 साल बाद विजय माल्या, “किंग ऑफ गुड टाइम्स” ने तोड़ी चुप्पी
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Akhand Rashtra News > एक्सक्लूसिव > 9 साल बाद विजय माल्या, “किंग ऑफ गुड टाइम्स” ने तोड़ी चुप्पी
एक्सक्लूसिवदेशविदेशसम्पादकीय

9 साल बाद विजय माल्या, “किंग ऑफ गुड टाइम्स” ने तोड़ी चुप्पी

Adminakhandrashtra
Last updated: June 8, 2025 8:49 am
Adminakhandrashtra
8 months ago
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  • ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)

5 जून 2025 को, उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर राज शमानी ने अपने पॉडकास्ट “फिगरिंग आउट” के 364वें एपिसोड में विवादास्पद व्यवसायी विजय माल्या के साथ चार घंटे की लंबी बातचीत रिलीज की। यह पॉडकास्ट, जिसका शीर्षक था “विजय माल्या पॉडकास्ट: राइज़ एंड डाउनफॉल ऑफ किंगफिशर एयरलाइंस, लोन्स एंड आरसीबी,” माल्या की नौ साल बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी। इसने सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में व्यापक चर्चा छेड़ दी, जिसमें 10 घंटे के भीतर 27 लाख से अधिक बार देखा गया। यह लेख इस पॉडकास्ट के मुख्य बिंदुओं, माल्या के दावों, और इससे उत्पन्न प्रतिक्रियाओं का एक संतुलित और तटस्थ विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें सभी प्रासंगिक जानकारी शामिल है।

पॉडकास्ट का परिचय और संदर्भ

विजय माल्या, जिन्हें “किंग ऑफ गुड टाइम्स” के रूप में जाना जाता है, एक भारतीय व्यवसायी हैं, जिन्होंने यूनाइटेड ब्रुअरीज ग्रुप, किंगफिशर एयरलाइंस, और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) जैसी संस्थाओं के साथ अपनी पहचान बनाई। हालांकि, 2016 में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के बाद वह भारत छोड़कर यूनाइटेड किंगडम चले गए। भारत सरकार ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया, और उनके खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है। इस पॉडकास्ट में, माल्या ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अपने जीवन, व्यवसाय, और कानूनी विवादों पर खुलकर बात की।

राज शमानी, एक युवा उद्यमी और भारत के प्रमुख पॉडकास्टरों में से एक, ने इस साक्षात्कार को एक मंच प्रदान किया, जिसे कई लोगों ने साहसी कदम माना। पॉडकास्ट में माल्या के बचपन, उनके पिता विट्टल माल्या के साथ संबंध, किंगफिशर एयरलाइंस की स्थापना और पतन, और उनकी वर्तमान स्थिति जैसे विषय शामिल थे। यह साक्षात्कार यूट्यूब पर रिलीज होने के बाद वायरल हो गया, और इसने विभिन्न हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं।

पॉडकास्ट के मुख्य बिंदु

  1. माल्या का बचपन और व्यवसाय की शुरुआत: माल्या ने अपने शुरुआती जीवन के बारे में बताया, जिसमें कोलकाता में उनके सख्त पिता विट्टल माल्या के तहत परवरिश शामिल थी। उन्होंने बताया कि उनके पिता का रूढ़िगत व्यवसाय दृष्टिकोण उनके जोखिम लेने वाले और चमक-दमक वाले अंदाज से काफी अलग था। माल्या ने किंगफिशर बियर और मैकडॉवेल्स नंबर 1 जैसे ब्रांड्स को बढ़ाने में अपनी भूमिका पर प्रकाश डाला, जो उनके पारंपरिक और नवोन्मेषी दृष्टिकोण का मिश्रण था।
  2. किंगफिशर एयरलाइंस का उत्थान और पतन: पॉडकास्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा किंगफिशर एयरलाइंस की कहानी थी। माल्या ने बताया कि कैसे उन्होंने 2005 में इस एयरलाइन की स्थापना की, जिसे उन्होंने लक्जरी एविएशन का प्रतीक बनाना चाहा। हालांकि, परिचालन संबंधी समस्याएं, बढ़ते ईंधन की कीमतें, और वित्तीय कुप्रबंधन ने एयरलाइन को 2012 तक बंद होने के लिए मजबूर कर दिया। माल्या ने दावा किया कि भारत में व्यावसायिक विफलता को अक्सर धोखाधड़ी के रूप में देखा जाता है, और उन्होंने इसे अपनी स्थिति का एक प्रमुख कारण बताया।
  3. कानूनी विवाद और भगोड़ा टैग: माल्या ने 9,000 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “मुझे भगोड़ा कह सकते हैं, क्योंकि मैं भारत वापस नहीं लौटा, लेकिन चोर कहना गलत है। मैंने कोई चोरी नहीं की।” उन्होंने यह भी दावा किया कि बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस के 6,200 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले 14,131.60 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं, जैसा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा था। माल्या ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में अपनी याचिका का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने बैंकों से वसूली गई राशि का हिसाब मांगा था।
  4. भारत लौटने की शर्त: जब राज शमानी ने पूछा कि क्या वह भारत लौटना चाहेंगे, माल्या ने कहा, “अगर मुझे निष्पक्ष सुनवाई और सम्मानजनक जीवन का आश्वासन मिले, तो मैं निश्चित रूप से इस पर गंभीरता से विचार करूंगा।” हालांकि, उन्होंने भारतीय जेलों की स्थिति पर चिंता जताई, यह कहते हुए कि यूके के उच्च न्यायालय ने अन्य मामलों में भारतीय हिरासत की स्थिति को यूरोपीय मानवाधिकार संधि (ECHR) का उल्लंघन माना है।
  5. किंगफिशर कर्मचारियों के लिए माफी: माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों से माफी मांगी, यह कहते हुए कि उन्हें कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी का गहरा अफसोस है। उन्होंने बताया कि 2012-2015 के बीच कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया था, जिसके कारण कर्मचारियों को भुगतान प्राथमिकता नहीं दी जा सकी।
  6. अन्य विषय: माल्या ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) की स्थापना, फॉर्मूला 1 में उनकी भागीदारी, और किंगफिशर कैलेंडर के पीछे की कहानी पर भी चर्चा की। उन्होंने अपनी लग्जरी और विंटेज कारों के प्रति प्रेम को भी साझा किया, जो उनकी “किंग ऑफ गुड टाइम्स” छवि का हिस्सा था।

सार्वजनिक और सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं

पॉडकास्ट के रिलीज होने के बाद, सोशल मीडिया पर तीखी और मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने राज शमानी की प्रशंसा की, जिन्होंने एक विवादास्पद हस्ती को मंच प्रदान करने का साहस दिखाया। एक यूजर ने लिखा, “27 लाख व्यूज 10 घंटे में! राज शमानी भारत के सबसे बड़े पॉडकास्टर हैं।” वहीं, कुछ लोगों ने माल्या को मंच देने की आलोचना की, इसे अपराधियों को सफेद करने का प्रयास बताया। एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि भगोड़े को हीरो की तरह पेश किया जा रहा है।

“कॉमेडियन शुभम गौड़ ने एक मजेदार वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने कहा, “मैंने माल्या का पूरा पॉडकास्ट देखा, और अब मुझे लगता है कि हमें उनसे उल्टा पैसे लौटाने चाहिए।” यह वीडियो भी वायरल हो गया। इसके अलावा, अभिनेता अभिषेक बनर्जी का एक पुराना टीवीएफ स्किट, जिसमें उन्होंने माल्या की पैरोडी की थी, भी फिर से वायरल हुआ।

विश्लेषण

यह पॉडकास्ट एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और मीडिया घटना बन गया, जिसने न केवल माल्या के दृष्टिकोण को सामने लाया, बल्कि भारत में व्यावसायिक विफलता, कानूनी प्रणाली, और मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा को प्रेरित किया। माल्या के दावों, जैसे कि बैंकों द्वारा अधिक वसूली, को कुछ लोगों ने तथ्यात्मक माना, क्योंकि यह वित्त मंत्री के बयान से समर्थित है। हालांकि, उनके खिलाफ गंभीर आरोपों और भारत सरकार के प्रत्यर्पण प्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

राज शमानी ने इस साक्षात्कार के माध्यम से एक जटिल और विवादास्पद व्यक्तित्व को समझने का अवसर प्रदान किया। हालांकि, यह भी सवाल उठता है कि क्या इस तरह के मंच अपराधियों को सफेद करने का जोखिम उठाते हैं। दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि यह पत्रकारिता और क्रिएटर इकोनॉमी का एक साहसी उदाहरण है, जो पारंपरिक मीडिया के दायरे से बाहर जाकर कहानियों को सामने लाता है।

अंततः, यह पॉडकास्ट न केवल विजय माल्या की कहानी को फिर से जीवंत करता है, बल्कि भारत में न्याय, वित्त, और मीडिया नैतिकता जैसे व्यापक मुद्दों पर भी प्रकाश डालता है। यह एक ऐसी चर्चा है जो शायद लंबे समय तक चलती रहेगी।

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