जौनपुर। शहर के एक प्रतिष्ठित पत्रकार ने फेसबुक पर एक स्थानीय फेसबुकिया पत्रकार के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी की है। आरोप है कि इस पत्रकार ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट/समाचार में “कैविएट दाख़िल” होने और “अरेस्ट स्टे झूठा” होने का दावा किया, जबकि माननीय हाई कोर्ट ने 5 अगस्त को गिरफ्तारी पर रोक (Stay on Arrest) का स्पष्ट आदेश पारित किया है, जो वर्तमान में प्रभावी है।
सूत्रों के अनुसार, अधिवक्ता के माध्यम से तैयार किए जा रहे नोटिस में कहा गया है कि यह समाचार/पोस्ट तथ्यहीन, भ्रामक और न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। साथ ही, इससे संबंधित व्यक्ति की सामाजिक, व्यक्तिगत और व्यावसायिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुँची है।
नोटिस में 7 दिनों के भीतर:
1. प्रकाशित सामग्री को सार्वजनिक रूप से खंडित करने,
2. समान माध्यम पर लिखित या वीडियो माफ़ी प्रकाशित करने,
3. ₹5 लाख का हर्जाना अदा करने
की मांग की जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि नोटिस में यह भी चेतावनी दी जाएगी कि समयसीमा में मांगें पूरी न होने पर फेसबुकिया पत्रकार के खिलाफ फौजदारी मानहानि, सिविल डिफेमेशन, न्यायालय की अवमानना याचिका और आईटी अधिनियम के तहत आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाएगी।

