नई दिल्ली (अखंड राष्ट्र न्यूज़): जब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध पर टिकी हैं, तब समुद्र के रास्ते एक भारतीय झंडे वाला जहाज ‘ग्रीन सान्वी’ (Green Sanvi) भारत के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। यह जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के सबसे संवेदनशील रास्ते को पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है। आइए जानते हैं इस जहाज और इसके मालिक की पूरी कहानी।
कौन है ‘ग्रीन सान्वी’ का असली मालिक?
शिपिंग डेटाबेस और रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘ग्रीन सान्वी’ जहाज का स्वामित्व MOL India के पास है।
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MOL India जापान की दिग्गज ग्लोबल शिपिंग कंपनी Mitsui O.S.K. Lines (MOL) की भारतीय शाखा है।
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यह जहाज भारतीय झंडे (Indian Flag) के नीचे संचालित होता है और इस पर मौजूद चालक दल (Crew) भी भारतीय ही है।
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युद्ध के दौरान हमलों से बचने के लिए इस जहाज ने अपने सिग्नल में ‘Indian Ship, Indian Crew’ का संदेश प्रसारित किया है, ताकि इसे गलत पहचान का शिकार न होना पड़े।
कितना पुराना है यह जहाज? (Ship Age & Details)
‘ग्रीन सान्वी’ कोई नया जहाज नहीं है, बल्कि यह एक अनुभवी और विशालकाय गैस कैरियर है:
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निर्माण वर्ष: इस जहाज को साल 2009 में दक्षिण कोरिया के हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज (Hyundai HI) शिपयार्ड में बनाया गया था।
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उम्र: 2026 के हिसाब से यह जहाज लगभग 17 साल पुराना है।
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क्षमता: यह एक VLGC (Very Large Gas Carrier) श्रेणी का जहाज है, जिसकी कुल क्षमता लगभग 58,811 मीट्रिक टन (DWT) है।
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लंबाई: इसकी कुल लंबाई लगभग 225 मीटर और चौड़ाई 36 मीटर है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?
भारत अपनी LPG (रसोई गैस) जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है। ‘ग्रीन सान्वी’ करीब 44,000 से 58,000 टन LPG लेकर आ रहा है।
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ऊर्जा सुरक्षा: युद्ध के कारण सप्लाई रुकने से भारत में गैस की किल्लत हो सकती है। ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना घरेलू कीमतों को स्थिर रखने के लिए बेहद जरूरी है।
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होर्मुज का 7वां योद्धा: युद्ध शुरू होने के बाद से ‘ग्रीन सान्वी’ होर्मुज पार करने वाला 7वां भारतीय एलपीजी टैंकर है। इससे पहले शिवालिक, नंदा देवी और जग वसंत जैसे जहाज सुरक्षित लौट चुके हैं।
मौजूदा स्थिति: लारक-क़ेश्म चैनल में ‘ग्रीन सान्वी’
ताजा शिप-ट्रैकिंग डेटा (VesselFinder) के मुताबिक, ग्रीन सान्वी ने ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के बीच बने संकरे गलियारे का इस्तेमाल किया है। जबकि ‘जग विक्रम’ और ‘ग्रीन आशा’ जैसे अन्य भारतीय टैंकर अभी भी सुरक्षा कारणों से होर्मुज के पास रुके हुए हैं, ग्रीन सान्वी ने अपनी यात्रा जारी रखी है।
