Iran का नया 14-सूत्रीय प्रस्ताव और पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल
पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रयासों के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा हाल ही में पश्चिम एशिया के युद्ध को समाप्त करने के लिए एक 9 सूत्रीय फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा गया था, जिसके जवाब में तेहरान ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक नया 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव अमेरिका को सौंप दिया है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाया है। इस प्रस्ताव में Iran ने अपनी शर्तें बहुत ही आक्रामक और स्पष्ट तरीके से रखी हैं। Iran ने मांग की है कि अमेरिका लेबनान सहित सभी मोर्चों पर चल रहे युद्ध को तुरंत प्रभाव से समाप्त करे, नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह से हटाए, अपनी सेना को वापस बुलाए और होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक नई शासन व्यवस्था का गठन करे। इसके अलावा, इस 14-सूत्रीय योजना में सबसे महत्वपूर्ण मांग Iran पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने, Iran की विदेशी बैंकों में जब्त संपत्तियों को रिलीज करने और इस दौरान हुए नुकसान के लिए भारी मुआवजे की मांग भी शामिल है। Iran का यह कदम यह साबित करता है कि वह किसी भी दबाव में झुकने के बजाय अपनी शर्तों पर ही किसी भी समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है। क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए Iran ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी कूटनीतिक वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करना होगा। यह घटनाक्रम आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीति और कूटनीति की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Iran के उप विदेश मंत्री की दो-टूक, कूटनीति या युद्ध के लिए तैयार
Iran ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 2 महीने के युद्धविराम की योजना को पूरी तरह से नकार दिया है। इसके बजाय, तेहरान ने सभी विवादित और महत्वपूर्ण मुद्दों को हल करने के लिए मात्र 30 दिन की समय-सीमा का प्रस्ताव रखा है। Iran के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक सख्त और दो-टूक बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्होंने कहा कि अब यह पूरी तरह से अमेरिका के पाले में है कि वह वार्ता के माध्यम से कोई समझौता करना चाहता है या फिर खुले युद्ध की ओर लौटना चाहता है। गरीबाबादी ने तेहरान में राजनयिकों को संबोधित करते हुए यह चेतावनी दी कि Iran दोनों ही परिस्थितियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Iran अपने राष्ट्रीय हितों, अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए किसी भी हद तक जाने में सक्षम है। Iran की सरकारी मीडिया आईआरआईबी के अनुसार, गरीबाबादी ने कहा कि अब अमेरिका को कूटनीति का रास्ता चुनना है या टकराव का रुख अपनाना है, यह फैसला उन्हें खुद करना होगा। Iran की यह रणनीति दर्शाती है कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में आने के बजाय अपनी मांगों पर पूरी तरह से अडिग है और अमेरिका को यह संदेश दे रहा है कि क्षेत्र में उनके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह बयान दोनों देशों के बीच के तनाव को और अधिक गहरा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर मजबूती से डटे हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया और अमेरिका का रुख, हमलों की भी जताई संभावना
Iran के इस नए और आक्रामक 14-सूत्रीय प्रस्ताव पर अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है, जो आने वाले दिनों में काफी अहम साबित हो सकती है। ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन Iran के नवीनतम प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है, लेकिन साथ ही उन्होंने नए अमेरिकी हमलों की संभावना का भी संकेत दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि Iran के संबंध में अमेरिका की स्थिति बहुत मजबूत है और उन्हें नहीं लगता कि यह प्रस्ताव उनके लिए स्वीकार्य होगा। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले 47 वर्षों में Iran ने मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उसने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। ट्रंप का यह भी मानना है कि Iran के नेतृत्व में स्पष्टता का अभाव है और वे अभी तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनका असली नेता कौन है। ट्रंप ने बताया कि Iran ने उन्हें समझौते की अवधारणा के बारे में बताया है और अब वे इसके सटीक मतलब का इंतजार कर रहे हैं। ट्रंप के इस बयान से यह साफ होता है कि अमेरिका Iran के प्रस्ताव को इतनी आसानी से स्वीकार नहीं करेगा। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव की स्थिति अभी भी बरकरार है और आने वाले दिन पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के लिए काफी संवेदनशील हो सकते हैं।
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