Prayagraj: संगम नगरी Prayagraj की पहचान अब यहाँ के लजीज समोसों के साथ और भी गहरी होने वाली है। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जिला, एक व्यंजन’ (One District, One Dish) पहल के अंतर्गत Prayagraj के पारंपरिक समोसे को जिले का आधिकारिक ‘सिग्नेचर डिश’ घोषित किया गया है। कुरकुरे, सुनहरे और मसालेदार आलू से भरपूर इस व्यंजन ने कचौरी, रबड़ी लस्सी और इमरती जैसे अन्य लोकप्रिय व्यंजनों को पीछे छोड़ते हुए यह विशेष स्थान हासिल किया है।
क्या है ‘एक जिला, एक व्यंजन’ योजना?
राज्य सरकार द्वारा 2025-26 के बजट में इस महत्वाकांक्षी योजना को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के हर जिले के खास और पारंपरिक व्यंजनों को प्रोत्साहित करना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाना है।
सहायक आयुक्त उद्योग सारिका सिंह ने बताया कि Prayagraj के लिए इस डिश का चयन पूरी तरह से पारदर्शी और गहन प्रक्रिया के तहत हुआ है। चयन समिति ने स्थानीय खान-पान, सांस्कृतिक मान्यताओं और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखते हुए व्यापक सर्वेक्षण किया और इसी आधार पर समोसे को प्रयागराज की नई पाक पहचान के रूप में चुना गया।
समोसा व्यवसाय के प्रमुख आंकड़े
Prayagraj में समोसा केवल एक नाश्ता नहीं, बल्कि एक संस्कृति है। इससे जुड़े कुछ अहम आंकड़े इस प्रकार हैं:
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कारीगरों की संख्या: Prayagraj में वर्तमान में 01 हज़ार से अधिक समोसा कारीगरों की पहचान की गई है।
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सदियों पुराना कारोबार: शहर में 30 ऐसे प्रतिष्ठान मौजूद हैं जो 100 साल से भी अधिक समय से समोसा बनाने और बेचने के व्यवसाय से सफलतापूर्वक जुड़े हुए हैं।
