wभारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 6 अक्टूबर 2026 को एक बेहद महत्वपूर्ण ECI Press Note जारी किया है। इस प्रेस विज्ञप्ति के जरिए आयोग ने राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों के मार्च तथा मुलाकात के प्रस्ताव को लेकर चल रहे तमाम कयासों और राजनीतिक बयानों पर आधिकारिक स्थिति साफ की है। आयोग का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रदर्शन और हिरासत की खबरों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।
ECI Press Note: प्रमुख बातें
निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और समय निर्धारण का सच
भारतीय निर्वाचन आयोग ने अपने आधिकारिक प्रेस नोट में इस बात पर जोर दिया है कि वर्ष 2025 से ही राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक तयशुदा और पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। सभी राजनीतिक दलों को इसकी विधिवत जानकारी दी जा चुकी है। आयोग के नियमों के अनुसार, जब भी कोई दल या संयुक्त गठबंधन मिलना चाहता है, तो वह अपने अधिकृत प्रतिनिधि (Authorised Representative) के माध्यम से पहले समय मांगता है।
राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए तय प्रक्रिया
जब भी कोई दल या संयुक्त गठबंधन चुनाव आयोग से मिलना चाहता है, तो वह अपने अधिकृत प्रतिनिधि (Authorised Representative) के माध्यम से पहले समय मांगता है।
इसके बाद आयोग समय की अनुकूलता के अनुसार बैठक की तारीख और समय निर्धारित करता है।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के दिन, आयोग के पास शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल की तरफ से मिलने के लिए कोई पूर्व निर्धारित समय नहीं मांगा गया था। मीडिया के माध्यम से ही यह जानकारी मिली कि मार्च के दौरान कुछ सांसद आयोग से मिलना चाहते हैं। इस संदर्भ के दौरान आयोग ने अपनी स्थिति को
ECI Official Website
के निर्देशों के अनुरूप रखा है।
प्रोटोकॉल और संसद एनेक्सी बैठक के प्रस्ताव पर असहमति
शाम लगभग 4 बजे दिल्ली पुलिस के जरिए यह सूचना मिली कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन सौंपना चाहता है। इस पर विचार करते समय दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने यह जानकारी दी कि यह बैठक 240 सांसदों के बड़े समूह के साथ होनी है और इसका प्रस्तावित स्थल संसद भवन ‘एनेक्सी’ है।
“जब निर्वाचन आयोग इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा था, तो इसे असामान्य पाया गया क्योंकि आयोग के प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी मुलाकातें हमेशा भारत निर्वाचन आयोग के परिसर में ही होती हैं।”
घटनाक्रम: बैठक विवाद में क्या हुआ?
वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने के प्रस्ताव को क्यों किया गया अस्वीकार
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाने का प्रस्ताव रखा था। ECI ने कहा कि सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को सीधे बैठक स्थल पर भेजा जा सकता है। हालांकि, इस अनूठे और लचीले रुख के बावजूद इस अनुरोध को भी माननीय सांसदों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।
आधिकारिक स्थापन और आयोग का बयान
इस पूरे विवाद पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अंत में, उप-निदेशक (Deputy Director) पी. पवन के हस्ताक्षर के साथ आयोग का यह मुख्य आधिकारिक स्थापन (official stand) सामने आया है:
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का आधिकारिक स्थापन
“कोई भी राजनीतिक दल, किसी भी समय, चुनाव आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है; एवं आयोग समय की अनुकूलता के दृष्टिगत, उनसे मिलने की तिथि और समय निर्धारित कर सकता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।”
निष्कर्ष और आगे का राजनीतिक रुख
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी यह ECI Press Note इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि संस्था अपने तय नियमों और कानूनी दायरे के तहत ही काम करती है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रहा है, वहीं चुनाव आयोग के इस खुलासे ने इस पूरे हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामे में एक नया मोड़ ला दिया है।
आप इस Akhand Rashtra News पर इस तरह की अन्य Rajniti News भी पढ़ सकते हैं।


