पंजाब के मानसा जिले में Anti-Drug एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। हत्या के मुख्य आरोपी अश्विनी को पंजाब और राजस्थान पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में राजस्थान के चूरू स्थित सालासर बालाजी मंदिर के पास से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी वहां भेष बदलकर छिपा हुआ था। गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आरोपी के घर पर अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई की।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद भड़की भीड़, आरोपी की दुकान में लगाई आग
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब गुस्साई भीड़ ने आरोपी अश्विनी की एक कमर्शियल दुकान को आग के हवाले कर दिया। मौके पर मौजूद एक निहंग सिख ने इस जनता के गुस्से का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि पंजाब में नशीले पदार्थों के धंधे से जुड़े लोगों के प्रतिष्ठानों का यही हश्र होगा। उन्होंने कहा कि परमिंदर सिंह झोटा की मौत का बदला लेने के लिए हर कोई अब ‘झोटा’ बन चुका है और ड्रग्स बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
‘वारिस पंजाब दे’ और अमृतपाल सिंह को लेकर गरमाई सियासत
इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। निहंग सिख ने युवाओं से ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह का समर्थन करने की अपील करते हुए दावा किया कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया जाए तो राज्य से ड्रग्स का नामोनिशान मिट जाएगा। दूसरी ओर, तरनतारन में अमृतपाल सिंह के सहयोगी सरदार गुरप्रीत सिंह की रिश्तेदार मंजीत कौर ने आरोप लगाया कि उन्हें मानसा जाने से रोकने के लिए पुलिस ने सुबह-सुबह जबरन हिरासत में लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
यह भी पढ़ें: मोदी जी, तिरंगा फहराना अपराध है या RSS मुख्यालय पर 52 साल तक न फहराना?
विपक्ष का हमला और मानवाधिकार आयोग (NHRC) का संज्ञान
इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पंजाब की भगवंत मान सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से मामले की जांच और की गई कार्रवाई पर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है। मृत एक्टिविस्ट के परिजनों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से न्याय की गुहार लगाई है।


