हरदीप सिंह पुरी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अंतिम मुहर लगा दी है। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी, जिस पर अब पार्टी ने अपने वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को उच्च सदन भेजने की पूरी तैयारी कर ली है।
मध्य प्रदेश में खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही कई प्रमुख नेताओं के नामों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में चल रही थी। हालांकि, बीजेपी आलाकमान ने प्रशासनिक अनुभव और वरिष्ठता को प्राथमिकता देते हुए केंद्रीय मंत्री को मैदान में उतारने का फैसला किया है। विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से इस सीट पर पार्टी उम्मीदवार की जीत पूरी तरह से तय मानी जा रही है।
हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाने के मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरदीप सिंह पुरी को उच्च सदन भेजने का फैसला बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे पुरी का कार्यकाल जल्द समाप्त हो रहा था, ऐसे में उन्हें संसद के उच्च सदन में बनाए रखना सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन के लिए जरूरी समझा गया। पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन और प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
मध्य प्रदेश बीजेपी के नेताओं ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि केंद्रीय मंत्री का मध्य प्रदेश से प्रतिनिधित्व होना राज्य के विकास कार्यों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। केंद्र सरकार की विभिन्न शहरी और ऊर्जा विकास परियोजनाओं का लाभ राज्य को और तेजी से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी सीट
यह सीट पहले केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन के पास थी। मुरुगन पूर्व में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। हालांकि, बाद में पार्टी ने उन्हें अन्य चुनावी जिम्मेदारियां दीं और उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के चलते चुनाव आयोग को इस सीट के लिए उपचुनाव की अधिसूचना जारी करनी पड़ी।
उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही कयास लगाए जा रहे थे कि क्या पार्टी किसी स्थानीय चेहरे को मौका देगी या केंद्रीय नेतृत्व से किसी दिग्गज को उच्च सदन भेजा जाएगा। अंततः बीजेपी संसदीय बोर्ड ने केंद्रीय मंत्री के नाम पर सहमति जताकर सभी अटकलों को समाप्त कर दिया।
मध्य प्रदेश विधानसभा में दलीय स्थिति और समीकरण
मध्य प्रदेश विधानसभा के वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है। 230 सदस्यीय विधानसभा में सत्ताधारी दल के पास स्पष्ट और मजबूत संख्या बल मौजूद है, जिसके चलते कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों के लिए इस सीट पर मुकाबला करना संभव नहीं दिखता।
- बीजेपी के पास विधानसभा में 160 से अधिक विधायकों का मजबूत समर्थन है।
- विपक्षी दल कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल का अभाव है, जिससे मुकाबला एकतरफा माना जा रहा है।
- नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्विरोध निर्वाचन की प्रबल संभावना है।
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केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनका सफर
पूर्व भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी रहे केंद्रीय मंत्री ने अपने कूटनीतिक जीवन के बाद राजनीति में कदम रखा था। वे भारत सरकार में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कुशलतापूर्वक संभाल चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान स्मार्ट सिटी मिशन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में कई बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए हैं।
संसद में अपनी तार्किक बहस और अंतरराष्ट्रीय मामलों की गहरी समझ के लिए जाने जाने वाले इस वरिष्ठ नेता की संसद में उपस्थिति पार्टी के लिए हमेशा मजबूत पक्ष रही है। अब मध्य प्रदेश से निर्वाचित होकर वे एक बार फिर राज्यसभा में सरकार के नीतिगत एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।


