वाराणसी/लखनऊ: उत्तर प्रदेश MLC चुनाव 2026 में सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देखने को मिला है। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी लाल बिहारी यादव ने बीजेपी उम्मीदवार को एकतरफा मुकाबले में हराकर अपनी सीट बचा ली है। पीएम के गढ़ में मिली इस करारी हार ने सत्ताधारी बीजेपी के लिए चिंता बढ़ा दी है, वहीं विपक्षी खेमे को बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है।
पहले चरण से ही हावी रहे सपा के लाल बिहारी यादव
वाराणसी में बैलेट पेपर के जरिए हुई मतगणना में सपा उम्मीदवार लाल बिहारी शुरुआत से ही निर्णायक बढ़त बनाए हुए थे। दो चरणों की गिनती के बाद लाल बिहारी यादव ने कुल 10,958 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा 6,060 वोटों पर ही सिमट गए। करीब 4,898 वोटों की इस बड़ी हार ने वाराणसी में भाजपा के शिक्षक वोट बैंक के दावों की हवा निकाल दी है।
विपक्षी दलों ने घेरा, ‘बैलेट पेपर’ के मुद्दे को दी हवा
वाराणसी का परिणाम आते ही आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं ने बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया। आप सांसद संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होते ही भाजपा की जमीनी हकीकत सामने आ जाती है। सपा नेताओं का कहना है कि यह जीत साबित करती है कि अगर पारदर्शी तरीके से चुनाव कराए जाएं तो जनता बीजेपी के खिलाफ वोट दे रही है।
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स्नातक सीट पर भी बीजेपी की हालत पस्त
शिक्षक सीट गंवाने के बाद भाजपा के लिए वाराणसी स्नातक सीट के रुझान भी राहत देने वाले नहीं हैं। स्नातक सीट पर भी सपा प्रत्याशी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से बढ़त बनाए हुए हैं। हालांकि, स्नातक सीट के अंतिम परिणाम के लिए चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन वाराणसी के इस दोहरे झटके ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के गढ़ में सपा की मजबूत पैठ को साबित कर दिया है।


