लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए एमएलसी चुनावों (शिक्षक और स्नातक सीटें) में BJP ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए अपना मजबूत आधार तैयार कर लिया है। एमएलसी चुनाव मुख्य रूप से पढ़े-लिखे वर्ग (शिक्षकों और स्नातकों) द्वारा वोट किए जाते हैं, और इस वर्ग में मिली एकतरफा जीत को बीजेपी अपने सुशासन मॉडल की कामयाबी के तौर पर पेश कर रही है।
अमित शाह के दौरे से चुनावी शंखनाद की तैयारी
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह के आगामी लखनऊ दौरे के साथ ही उत्तर प्रदेश में चुनाव अभियान पूरी तरह से शुरू हो जाएगा। बीजेपी नेता प्रकाश पाल ने इसे समझाते हुए कहा, “अमित शाह हमारे ‘चाणक्य’ हैं। उनके आने से कार्यकर्ताओं में जो जोश भरेगा, उससे हम यूपी में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य को पार करेंगे।” इस दौरे से पहले लखनऊ में बैठकों का दौर तेज हो गया है ताकि संगठनात्मक रणनीतियों को अंतिम रूप दिया जा सके।
बैलेट पेपर चुनाव ने छीना कांग्रेस का ‘EVM हथियार’
इन चुनावों का एक बड़ा रणनीतिक पहलू यह भी है कि इसने विपक्ष, खास तौर पर कांग्रेस के हाथ से ‘EVM में धांधली’ का मुद्दा लगभग छीन लिया है। बीजेपी अब इस नैरेटिव को जोर-शोर से भुना रही है कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी कांग्रेस पूरे देश में कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाई। बीजेपी नेता सुशील कुमार सिंह ने दिल्ली में सवाल दागा कि “जो विपक्ष बैलेट पेपर की मांग करता था, वह इसमें शर्मनाक हार के बाद अब जनता को क्या जवाब देगा?“
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‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नया अध्याय
बीजेपी ने एमएलसी नतीजों को सीधे तौर पर ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ से जोड़ दिया है। पंकज चौधरी का यह बयान कि “पढ़े-लिखे वर्ग ने कांग्रेस को जीरो देकर नकार दिया है,” साफ दर्शाता है कि बीजेपी 2027 के महासमर में कांग्रेस को मनोवैज्ञानिक रूप से पूरी तरह बैकफुट पर धकेलने की रणनीति पर काम कर रही है। कुल मिलाकर, अमित शाह के दौरे से पहले बीजेपी ने अपनी चुनावी मशीनरी को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है।


