लखनऊ: उत्तर प्रदेश MLC चुनाव के नतीजों ने 2027 के विधानसभा महासमर से ठीक पहले राज्य की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। 11 सीटों पर हुए इस ‘सेमीफाइनल’ में भले ही बीजेपी को 6 और सपा को 5 सीटें मिली हों, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी की हार ने समाजवादी पार्टी को एक मजबूत राजनीतिक हथियार थमा दिया है।
वाराणसी में लाल बिहारी की MLC जीत बनी सपा का सबसे बड़ा ढाल
वाराणसी की शिक्षक सीट पर सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव की ऐतिहासिक जीत को समाजवादी पार्टी बीजेपी के ‘अजेय’ होने के दावों पर करारी चोट के रूप में भुना रही है। सपा नेताओं का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री के अपने क्षेत्र में बीजेपी हार सकती है, तो इससे साफ है कि पूरे प्रदेश का मूड बदल रहा है।
पीएम मोदी के ‘तंज’ पर सपा का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक्स (X) पर बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस के शून्य पर सिमटने को लेकर कसे गए तंज पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी असलियत छिपाने की कोशिश कर रही है, जबकि सच यह है कि उत्तर प्रदेश की जनता ने बीजेपी को नकार दिया है।
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2024 के ‘यूपी मॉडल’ को 2027 में दोहराने की तैयारी
सपा सांसद राजीव राय के बयानों से साफ है कि ‘इंडिया’ गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनावों की सफलता को 2027 में भी दोहराना चाहता है। हर राज्य के अलग जातिगत समीकरणों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यूपी में 2024 के परिणाम हमारे अनुकूल रहे थे। सपा अब ‘PDA’ कार्ड के जरिए पिछड़े, दलित और शिक्षक वर्ग को साधकर 2027 में लखनऊ की सत्ता पर काबिज होने का ताना-बाना बुन रही है।


