आंध्र प्रदेश और ओडिशा के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। कोटिया पंचायत के 21 गांवों को लेकर दोनों राज्य आमने-सामने हैं। आंध्र प्रदेश सरकार ने इन विवादित गांवों में पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी कर दी है। इससे भाजपा शासित ओडिशा और टीडीपी शासित आंध्र प्रदेश के बीच तनाव बढ़ गया है। दोनों दल एनडीए के सहयोगी हैं, इसलिए यह विवाद राजनीतिक रूप से और भी पेचीदा हो गया है। बीजेडी और कांग्रेस भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
कोटिया ग्राम पंचायत ओडिशा के कोरापुट जिले के पोटांगी ब्लॉक में स्थित है। इसमें कुल 28 गांव हैं, जिनमें से 21 पर दोनों राज्य अपना दावा करते हैं। ओडिशा का कहना है कि ये गांव उसके क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। आंध्र प्रदेश का दावा है कि ये गांव पार्वतीपुरम मण्यम जिले के सालुर ब्लॉक में आते हैं।
इस विवाद की जड़ें 1936 से पहले की हैं, जब ये गांव जेपोर एस्टेट का हिस्सा थे। ओडिशा प्रांत बनने के बाद कुछ इलाके आंध्र की तरफ चले गए, लेकिन इन 21 गांवों का सही नक्शा कभी नहीं बन पाया। 1968 में ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया और कहा कि सीमा विवाद संसद तय करे। 2022 में ओडिशा ने फिर याचिका दायर की, जो अभी लंबित है।
चुनाव अधिसूचना से बढ़ा विवाद
आंध्र प्रदेश ने हाल ही में फागुनासिनेरी, गंजेईपादार और फाटुसिनेरी समेत तीन गांवों में पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की। इससे ओडिशा में हंगामा मच गया। बीजेडी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर सरकार की “चुप्पी” पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि टीडीपी के साथ एनडीए गठबंधन के कारण भाजपा ओडिशा के हितों की रक्षा नहीं कर रही।
बीजेडी ने शुक्रवार को एक प्रतिनिधिमंडल कोटिया भेजने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि आंध्र प्रदेश की गतिविधियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हैं।
भाजपा का जवाब
ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार पूरी तरह तैयार है और आंध्र की किसी भी उत्तेजक कार्रवाई को रोकने के लिए कदम उठाएगी। उन्होंने बीजेडी पर आरोप लगाया कि 24 साल के शासन में उन्होंने इस मुद्दे को हल नहीं किया। ओडिशा सरकार सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका फिर से सक्रिय करने की तैयारी में है।
केंद्रीय नेता धर्मेंद्र प्रधान ने दोनों राज्यों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
कांग्रेस और अन्य दलों की भूमिका
कांग्रेस ने भी दोनों दलों पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा और बीजेडी दोनों ही इस लंबे विवाद को सुलझाने में नाकाम रहे। स्थानीय स्तर पर लोग दोनों राज्यों के वोटर कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड रखते हैं। दोनों राज्य वहां स्कूल और राशन दुकानें चलाते हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
राजनीतिक पेच
यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि भाजपा और टीडीपी दोनों एनडीए के सहयोगी हैं। ओडिशा में भाजपा सरकार है, आंध्र में टीडीपी। बीजेडी इसे गठबंधन की मजबूरी बता रही है। वहीं भाजपा कह रही है कि वह कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत रुख अपना रही है।
कोटिया के लोग लंबे समय से दोनों राज्यों की प्रशासनिक सेवाओं का फायदा लेते आ रहे हैं। लेकिन अब चुनाव अधिसूचना के बाद तनाव बढ़ गया है। ओडिशा सरकार कानूनी रास्ता अपनाने की बात कर रही है, जबकि आंध्र प्रदेश चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर अड़ा हुआ है।
यह मामला सिर्फ सीमा का नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन का भी है। दोनों सहयोगी दलों के बीच यह टकराव एनडीए के अंदर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट या केंद्र सरकार इस लंबे विवाद का कोई स्थायी समाधान निकाल पाती है या नहीं।
बाहरी स्रोत
The Economic Times की रिपोर्ट: कोटिया के 21 गांवों पर आंध्र प्रदेश-ओडिशा विवाद
सीमा विवाद, पंचायत चुनाव और दोनों राज्यों के राजनीतिक रुख से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट।
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